आज से चैत्र नवरात्रि: नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है.मिलेगी विशेष कृपा

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. मां शैलपुत्री का स्वरूप बेहद सौम्य है. मां बैल पर सवार हैं और उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का फूल है. मां शैलपुत्री को पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है. मान्यता है कि मां अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और साधक के मूलाधार चक्र को जागृत करने में मदद करती हैं. मूलाधार चक्र हमारे शरीर में ऊर्जा का केंद्र है जो हमें स्थिरता और सुरक्षा प्रदान करता है. इसके अलावा कहा जाता है कि मां शैलपुत्री की पूजा में व्रत कथा पढ़ने और सुनने से व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूरी होती हैं.

पौराणिक कथा के अनुसार, मां शैलपुत्री राजा दक्ष प्रजापति की पुत्री थी, जिनका नाम सती था. उनका विवाह भगवान शिव से हुआ था, लेकिन राजा दक्ष प्रजापति नहीं चाहते थें कि उनकी पुत्री का विवाह शिवजी से हो, जिसकी वजह से वह अपनी पुत्री सती और भगवान शिव से नाराज रहते थे. एक बार प्रजापति दक्ष ने यज्ञ करवाने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने सभी देवी-देवताओं को निमंत्रण भेज दिया, अपनी पुत्री सती और दामाद भगवान शिव को नहीं बुलाया.Chaitra Navratri 2025 Day 1 Maa Shailputri Puja Vidhi Bhog Mantra in Hindi

देवी सती उस यज्ञ में जाने के लिए बेचैन थीं, लेकिन भगवान शिव ने उन्हें बिना निमंत्रण के वहां जाने से मना किया. लेकिन सती माता नहीं मानी और अपनी हठ पर अड़ी रहीं. इसके बाद महादेव को विवश होकर उन्हें भेजना पड़ा.सती जब अपने पिता प्रजापति दक्ष के यहां पहुंची तो वहां किसी ने भी उनसे प्रेमपूर्वक व्यवहार नहीं किया. उनका और भगवान शिव का उपहास उड़ाया. इस व्यवहार से देवी सती बहुत आहत हुईं. वो अपने पति का अपमान बर्दाश्त नहीं कर पाईं और क्रोधवश वहां स्थि​त यज्ञ कुंड में बैठ गईं. जब शिव को ये बात पता चली तो वे दुख और क्रोध की ज्वाला में जलते हुए वहां पहुंचे और यज्ञ को ध्वस्त कर दिया. कहा जाता है कि इसके बाद देवी सती ने ही हिमालय पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया. हिमालय की पुत्री होने के नाते देवी पार्वती को शैलपुत्री के नाम से जाना गया.

कलश स्थापना विधि

  • पूजा से पहले कलश स्थापना का विधान है।
  • आप सबसे पहले एक मिट्टी के पात्र को लेकर उसमें थोड़ी सी मिट्टी डाल दें।
  • फिर इस पात्र में जौ के बीज डालकर उसे मिलाएं।
  • इसके बाद मिट्टी के पात्र पर पानी से छिड़काव करें।
  • अब आप एक तांबे का लोटा लेकर उसपर स्वास्तिक का चिन्ह बनाएं।
  • उसके ऊपरी हिस्से में मौली बांधकर साफ जल भरें।
  • इस जल में दूब, अक्षत, सुपारी और कुछ पैसे रख दें।
  • अशोक की पत्तियां कलश के ऊपर रख दें।
  • अब पानी के एक नारियल को लाल चुनरी से लपेटकर मौली बांध दें।
  • इस नारियल को कलश के बीच में रख दें, और बाद में इसे पात्र के मध्य में स्थापित कर दें।

पूजन विधि

  • नवरात्रि की पूजा से पहले विधि-विधान से घट स्थापना करें।
  • वहीं नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री माता की पूजा की जाती है।
  • आप पूजा करने के लिए सबसे पहले अग्यारी करें और उसपर लौंग का जोड़ा रखें
  • अब देवी के समक्ष ज्योति जलाएं।
  • फिर कुछ मौसमी फल और बताशे प्रसाद के रूप में रखें।
  • अब कुमकुम, हल्दी, सफेद चंदन, अक्षत, सिंदूर अर्पित करें।
  • इसके अलावा आप पान, सुपारी, लौंग, नारियल 16 श्रृंगार का सामान चढ़ा सकते हैं।
  • नवरात्रि के पहले दिन देवी को सफेद रंग का पुष्प अर्पित करें।
  • फिर दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
  • अब मां शैलपुत्री के बीज मंत्रों का जाप करें और आरती करना शुरू करें।
  • अंत में माता की आरती करते हुए गलतियों की माफी मांगे।

नवरात्रि कैलेंडर

  • प्रतिपदा 30 मार्च 2025 शैलपुत्री
  • द्वितीया 31 मार्च 2025 ब्रह्मचारिणी
  • तृतीया 31 मार्च 2025  चंद्रघंटा
  • चतुर्थी 02 अप्रैल 2025 कुष्मांडा
  • पंचमी 03 अप्रैल 2025 स्कंदमाता
  • षष्ठी 04 अप्रैल 2025 कात्यायनी
  • सप्तमी 05 अप्रैल 2025 कालरात्रि
  • अष्टमी व नवमी 06 अप्रैल 2025 महागौरी व सिद्धिदात्री

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