समृद्धि न्यूज। भारत में तेजी से बढ़ते मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एक नई पहल की है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी मंत्रालयों, विभागों और स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे समोसा, कचौड़ी, फे्रंच फ्राइज, वड़ा पाव जैसे भारतीय नाश्तों में कितनी तेल और चीनी होती है, यह ऑयल और शुगर बोर्ड के जरिए साफ. साफ दिखाएं।
भारतीयों के सबसे फेवरेट स्ट्रीट फूड समोसा और जलेबी को सेहत के लिए सिगरेट जितना खतरनाक बताया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से एम्स नागपुर ने समोसा-जलेबी को हानिकारक बताया है। बार-बार यूज किए हुए तेल में पकाने के अलावा मैदा और मसाले का इस्तेमाल होने के कारण समोसे को दिल या दूसरे अंगों के लिए अच्छा नहीं माना जाता है। वहीं जलेबी को मैदा और चीनी से तैयार किया जाता है। भारत में घी या तेल में डीप फ्राई चीजों को बड़े शौक से खाया जाता है। पर ये कम उम्र में दिल का मरीज बनने का कारण बन जाती है।
मसालेदार आलू की फीलिंग से तैयार हुए समोसे में बहुत ज्यादा तेल होता है जो मैदा में मिल जाता है। मैदा, तेल और मसाले तीनों ही कुछ लोगों की सेहत के लिए खतरा होते हैं। 100 ग्राम समोसों के जरिए हमारी बॉडी में करीब 17 ग्राम तेल पहुंच जाता है। वहीं 2 कचौड़ी का 40 ग्राम वजन होता है और 40 ग्राम तेल जाता है। इसका मतलब आज जितने वजन की कचौड़ी खा रहे हैं शरीर में उतना ही तेल पहुंचता है। ऐसे स्नैक्स खाने से कम उम्र के बच्चों भी मोटापे का शिकार हो रहे हैं।
मंत्रालयों द्वारा की गई है अपील
- ऑयल और शुगर बोर्ड लगाना
- स्वास्थ्य संदेशों को स्टेशनरी में शामिल करना
- दफ्तरों में हेल्दी फूड उपलब्ध कराना- इसमें कम वसा वाला खाना, फल और सब्जियां ज्यादा, मीठे पेय और हाई फैट स्नैक्स की उपलब्धता सीमित करना शामिल है।
- शारीरिक गतिविधियों को बढ़ावा देना- इसमें सीढिय़ों के उपयोग को बढ़ाना, छोटे-छोटे एक्सरसाइज ब्रेक लेना और दफ्तर में वॉकिंग रूट बनाना शामिल है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश के अनुसार, ये बोर्ड कैफेटेरिया, लॉबी, मीटिंग रूम और अन्य सार्वजनिक स्थान लगाए जाएं। इसका मकसद यह है कि कर्मचारी और आम नागरिक रोजमर्रा की आदतों को सुधारें और हेल्दी खाना अपनाएं।
