न्याय न मिला तो मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह की धमकी

*कोतवाली पुलिस पर दबंगों के साथ मिलकर दुकान पर कब्जा कराने का आरोप
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। दबंगों के साथ कोतवाली पुलिस ने मिलकर दुकान पर कब्जा कर दिया। पीडि़ता ने चेतावनी दी कि दो दिन के अंदर दुकान कब्जा मुक्त नहीं हुई तो मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह कर लेगी। पीडि़़ता ने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर न्याय की गुहार लगाई।
जानकारी के अनुसार शहर कोतवाली के मोहल्ला सहतावनलाल घुमना निवासी शशिवाला पत्नी पीयूष जाटव, प्रीति पत्नी रमेश चंद, सुनील कुमार पुत्र स्वर्गीय सियाराम, दीपा गौतम पत्नी सुनील कुमार, सोनी पत्नी गंगाराम, जगत प्रसाद पुत्र गंगाराम ने दिए गए प्रार्थना पत्र में दर्शाया कि कोतवाली गेट पर दुकान है। जिस पर अनुपम अग्निहोत्री व उसके पुत्र मयूर, मयंक व भाई रुपम अग्निहोत्री जो कि नगर पालिका में कर्मचारी हैं निवासी खतराना फर्रुखाबाद ने षड्यंत्र, दबंगई के बल पर दुकान पर कब्जा करने की नियत से 2010 में अनुपम अग्निहोत्री व उसके दोस्त रिंकू चतुर्वेदी पुत्र अरविंद चतुर्वेदी निवासी नुनहाई कटरा में मालिकाना हक दिखाकर एक दूसरे पर न्यायालय में फर्जी वाद दायर किया और मुकदमा लड़ते रहे हैं। रिंकू चतुर्वेदी ने अपने मुकदमे में पैरवी करना बंद कर दिया। अनुपम अग्निहोत्री ने न्यायालय से एक तरफा फैसला अपने पक्ष में करा लिया। 10 सितंबर को अनुपमा व उसके पुत्र, भाई अपने साथ 50 लोगों को पुलिस के साथ मिलकर दुकान के ताले तोड़कर कब्जा कर लिया जब जानकारी पहुंचे तो रोकना चाहां तो जाति सूचक गाली-गलौज किया। जब इस संदर्भ में पुलिस से शिकायत की तो कोई सुनवाई नहीं हुई। एसपी को शिकायत की तो पुलिस ने जांच में पाया कि अनुपम व उसके बेटे भाई ने जबरिया धोखाधड़ी कर कब्जा किया है और तत्काल ताले खुलवा कर कब्जा करा दिया गया और इस मामले में जेल भी जा चुके हैं। 8 जून 2023 को पुन: अनुपम अग्निहोत्री ने अपने परिजनों व 50-60 अन्य व्यक्तियों के साथ कोतवाली के दरोगा सुबोध यादव, घुमना चौकी इंचार्ज सुनील यादव, मोहन सिंह, सिपाही महेश उपाध्याय, अंकित अन्य और चार सिपाहियों के साथ मिलकर पुन: कब्जा कर लिया। जब कोतवाली गई तो वहां से सिपाहियों ने भगा दिया। डीएम, एसपी, नगर मजिस्ट्रेट के बंगले पर जाकर न्याय की गुहार लगाई पर किसी ने नहीं सुना। एसपी के बंगले से फोनकर कोतवाल को कब्जा रुकवाने का आदेश दिया पर कोई कार्यवाही नहीं हुई। पीडि़ता ने निष्पक्ष जांच कराकर दुकान कब्जा मुक्त कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई कराने की मांग की। अगर उसे न्याय ना मिला तो प्रार्थना पत्र के 2 दिन बाद लखनऊ जाकर मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने पेट्रोल डालकर आत्महत्या कर लेगी। जिसके लिए पुलिस व आरोपी जिम्मेदार होंगे।

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