समृद्धि न्यूज। लोकसभा में सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान विदेश नीति को लेकर विपक्ष के सवालों का विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब दिया। इस दौरान कुछ ऐसा हुआ कि गृह मंत्री अमित शाह भडक़ गए। विदेश मंत्री के संबोधन के दौरान जब विपक्ष ने हंगामा किया तो अमित शाह खड़े हो गए। उन्होंने विपक्ष को जमकर लताड़ा और यहां तक कह दिया कि ये लोग 20 साल तक उधर ही बैठे रहेंगे।
लोकसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑपरेशन सिंदूर पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी है, हमने दुनिया के सामने पाकिस्तान को बेनकाब किया। उन्होंने सीजफायर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को भी खारिज किया। जयशंकर ने कहा कि भारत-पाक के बीच कोई मध्यस्थ नहीं था। लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा चल रही है। इसमें हिस्सा लेते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ हमारी जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी है। हमने यूएनएससी में अपनी बात रखी। दुनिया को बताया कि आतंकवाद पर हमारी जीरो टॉलरेंस की नीति है। यूएनएससी ने भारत का पक्ष माना, विदेश मंत्रालय का काम पाक की साजिश को बेनकाब करना था, हमें बहुत सख्त कदम उठाने पड़े, पहलगाम आतंकी हमले के बाद हमने सख्त कदम उठाए, हमने दुनिया के सामने पाकिस्तान को बेनकाब किया। इस दौरान उन्होंने सीजफायर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे को भी खारिज किया। सदन में बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, पहलगाम हमले के बाद एक साफ, मजबूत और दृढ़ संदेश भेजना जरूरी था, हमें यह स्पष्ट करना था कि इसके गंभीर परिणाम होंगे। पहला कदम जो उठाया गया, वह यह था कि 23 अप्रैल को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की बैठक हुई, इस बैठक में 5 फैसले लिए गए।
1960 की सिंधु जल संधि तत्काल प्रभाव से तब तक स्थगित रहेगी जब तक कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन देना बंद नहीं करता
- अटारी चेक पोस्ट को तत्काल प्रभाव से बंद करने का फैसला लिया गया
- एसएआरसी वीजा छूट योजना के तहत यात्रा कर रहे पाकिस्तानी नागरिकों को अब ऐसा करने की अनुमति नहीं होगी
- पाकिस्तानी हाई कमीशन के रक्षा, नौसेना और वायु सलाहकारों को अवांछित व्यक्ति घोषित किया जाएगा
- हाई कमीशन की कुल संख्या 55 से घटाकर 30 कर दी जाएगी
वहीं लोकसभा में विदेश मंत्री एस जयशंकर ऑपरेशन सिंदूर और विदेश नीति को लेकर जवाब दे रहे थे। जब विदेश मंत्री ने कहा कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 22 अप्रैल से 17 जून के बीच कोई बात नहीं हुई। इस पर विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष के हंगामे के बीच गृह मंत्री अमित शाह खड़े हुए। उन्होंने कहा कि मेरी एक बात पर आपत्ति है कि भारत देश का शपथ लिए विदेश मंत्री यहां बयान दे रहे हैं, विपक्ष को उन पर भरोसा नहीं है। उनको किसी और देश (पाकिस्तान) पर भरोसा है। मैं समझ सकता हूं कि उनकी पार्टी में विदेश का महत्व क्या है, इसका मतलब यह तो नहीं है कि पार्टी की सारी चीजें यहां सदन में आकर थोपें। भारत के विदेश मंत्री पर भरोसा नहीं करोगे। वोट लिया हुआ व्यक्ति यहां पर बोल रहा है। इसलिए आप विपक्ष में बैठे हैं और 20 साल तक वहीं बैठने वाले हैं। इसके बाद एक बार फिर जब विपक्ष ने टोकाटोकी की तो गृह मंत्री अमित शाह फिर से विदेश मंत्री के बचाव में उतरे।
