प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से फहराया तिरंगा, पाकिस्तान को दिया कड़ा संदेश

नई दिल्ली: भारत आज अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार 12वीं बार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 12वीं बार लगातार लाल किले की प्राचीर से तिरंगा फहराया है। पीएम मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा, मेरे प्यारे देशवासियों आजादी का यह महापर्व 140 संकल्पों का पर्व है। आजादी का ये पर्व सामूहिक सिद्धियों, गौरव का पर्व है, देश एकता की भावना को मजबूती दे रहा है, 140 करोड़ देशवासी तिरंगे के रंग में रंगे हैं, हर घर तिरंगा है। भारत के हर कोने से हिमालय हो या रेगिस्तान हो या समुद्र तट हो, हर तरफ एक ही गूंज है. हमारी प्राण से भी प्यारी मातृभूमि का जयगान है।
पीएम मोदी ने कहा कि हम मुंहतोड़ जवाब देंगे। मेरे प्यारे देशवासियों। भारत ने तय कर लिया है। खून और पानी एक साथ नहीं बहेंगे। अब देशवासियों को भली भांति पता चला है कि सिंधु का समझौता कितना अन्यायपूर्ण और एकतरफा है। भारत से निकलती नदियों का पानी दुश्मनों के खेतों को सींच रहा है और मेरे देश की धरती बिना पानी के प्यासी है। कैसा समझौता था, जिसने पिछले सात दशक से मेरे देश के किसानों का अकल्पनीय नुकसान किया है। हिंदुस्तान के हक का जो पानी है। उस पर अधिकार सिर्फ और सिर्फ हिंदुस्तान का है। हिंदुस्तान के किसानों का है। भारत कतई सिंधु समझौते को जिस स्वरूप में सहता रहा है, उसे नहीं सहेगा। किसान हित में और राष्ट्रहित में यह समझौता हमें मंजूर नहीं है।

पहलगाम हमले से पूरा विश्व चौंक गया: पीएम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, लाल किले की प्राचीर से ऑपरेशन सिंदूर के जवानों को सैल्यूट करने का अवसर मिला, वीर जवानों ने दुश्मनों को उनकी कल्पना से परे सजा दी है। 22 अप्रैल को पहलगाम में सीमा पार से आकर आतंकियों ने जैसा कत्लेआम किया, धर्म पूछकर लोगों का मारा, पत्नियों के सामने, बच्चों के सामने लोगों के मार दिया गया। पूरा देश गुस्से से भरा था, पूरा विश्व इस संहार से चौंक गया था।
पीएम मोदी ने कहा कि हमने ऑपरेशन सिंदूर में देखा कि आत्मनिर्भर भारत कितना सक्षम है। दुश्मन को पता भी नहीं चला कि कौन सा सामथ्र्य है जो उन्हें पल भर में खत्म कर रहा है। अगर हम आत्मनिर्भर न होते तो क्या हम इस तरह हो पाते। सप्लाई मिलेगा कि नहीं, कौन देगा कौन नहीं, लेकिन हमारे मेक इन इंडिया की बदौलत हमारी सेना पराक्रम करती रही। बीते 10 साल से हम मेक इन इंडिया को मिशन की तरह लेकर चले हैं। 21वीं सदी तकनीक की सदी है। जब तकनीक ड्रिवेन सदी है तो इतिहास गवाह है कि जिन देशों ने तकनीक में बढ़ोतरी हासिल की वो देश शिखर पर पहुंच गए। आर्थिक शक्ति के पैमाने पर पहुंचे हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि शुभांशु शुक्ला कुछ दिनों में भारत आ रहे हैं। हम मिशन गगनयान पर तेजी से काम कर रहे हैं। हम अपने स्पेस स्टेशन को बनाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। मेरे देश के 300 से ज्यादा स्टार्टअप्स सिर्फ स्पेस के सेक्टर में काम कर रहे हैं। ये है देश के नौजवानों की ताकत और देश का उन पर विश्वास। 2047 में जब आजादी के 100 साल होंगे तब विकसित भारत के संकल्प को परिपूर्ण के लिए हम तेजी से जुटे हैं। भारत इस संकल्प को पूरा करने के लिए आधुनिक ईकोसिस्टम तैयार कर रहा है। हर क्षेत्र में यह ईकोसिस्टम देश को आत्मनिर्भर बनाएगा। आज मेरा देश के युवा वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, और सरकार के सभी विभागों से आह्वान है कि क्या हमारा अपना मेड इन इंडिया फाइटर जेट्स के लिए जेट इंजन हमारा होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए।

न्यूक्लियर ब्लैकमेल अब नहीं सहेगा

देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि हमारा देश कई दशकों से आतंक को झेलता आया है। अब आतंक और आतंकी को पालने पोसने वालों को अब हम अलग- अलग नहीं मानेंगे। अब भारत ने तय कर लिया है कि न्यूक्लियर की धमकियों को अब हम सहने वाले नहीं है। न्यूक्लियर ब्लैकमेल लंबे अरसे से चला आया है। अब वो ब्लैकमेल नहीं सहा जाएगा। आगे भी दुश्मनों ने कोशिश जारी रखी हमारी सेना तय करेगी। सेना की शर्तों पर समय निर्धारित करे, जो लक्ष्य तय करे। अब हम अमल में लाकर रहेंगे। मुहतोड़ जवाब देंगे, भारत ने तय कर लिया है खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा।

सिंधु नदी समझौता हमें मंजूर नहीं: मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पाकिस्तान के साथ हुआ सिंधु नदी का समझौता अन्यायपूर्ण है, यह एकतरफा है। भारत से निकलता पानी दुश्मनों के खेत को सींच रहा है और मेरे देश का किसान, मेरे देश की धरती पानी के बिना प्यासी है। ये ऐसा समझौता था जिसने पिछले सात दशक से किसानों का अकल्पनीय नुकसान किया है। अब हिंदुस्तान के हक का जो पानी है, इस अधिकार हिंदुस्तान का है, हिंदुस्तान के किसानों का है, किसान हित में राष्ट्र हित में ये समझौता हमें मंजूर नहीं है।

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