SUDARSHAN CHAKRA: भारत के आयरन डोम सुदर्शन चक्र में मदद करेगा रूस

समृद्धि न्यूज। भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी टैरिफ के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में बाबुश्किन ने कहा कि रूसी बाजार भारतीय निर्यात का स्वागत करेगा। रूसी तेल खरीदने को लेकर अमेरिकी टैरिफ को लेकर भी रूसी राजनयिक ने सख्त रूख अपनाया। अमेरिका और यूरोप की ओर से भारत को रूस से तेल खरीदना कम करने को लेकर मिल रही धमकियों पर बाबुश्किन ने कहा किअगर पश्चिमी देश आपकी आलोचना करते हैं, तो इसका मतलब है कि आप सही दिशा में हैं। एक मीडिया ब्रीफिंग में बाबुश्किन ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई दिल्ली के साथ अपने देश के संबंधों में तेजी से सुधार का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि रूस भारत की विभिन्न सैन्य प्लेटफार्मों और हार्डवेयर की जरूरतों के लिए पसंदीदा साझेदार रहा है। वरिष्ठ रूसी राजनयिक ने यह भी कहा कि कहा कि रूस के नई दिल्ली की सुदर्शन चक्र नाम की एक नई वायु रक्षा प्रणाली बनाने की योजना का हिस्सा होने की उम्मीद है। परियोजना का ऐलान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान किया था।
जब रूसी राजदूत से भारत के आयरन डोम के बारे में पूछा गया तो उन्होंने तुरंत पूछा, आपका मतलब सुदर्शन चक्रसे है, इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि वे हिंदी में बेहतर जवाब दे सकते हैं। सुदर्शन चक्र उन्होंने ऐसा इसलिए बोला है, क्योंकि भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जिस एस-400 यूनिट का इस्तेमाल किया था, उसका नाम भी सुदर्शन चक्र यूनिट था। इसके अलावा एस-400 को लेकर उनकी यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से मिशन सुदर्शन चक्र का अनावरण करने के कुछ दिनों बाद आई है। उन्होंने कहा, हम इस समझ से आगे बढ़ते हैं कि जब इन प्रणालियों के विकास की बात आती है तो रूसी उपकरण इसका हिस्सा होंगे। रूसी प्रभारी ने भारत पर रूसी तेल खरीदना बंद करने के लिए लगातार अमेरिकी दबाव को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि इस तरह का रवैया और प्रतिबंध वैश्विक आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए हानिकारक है। बाबुश्किन ने कहा यह भारत के लिए एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है। हमें भारत के साथ अपनी साझेदारी पर भरोसा है और हम दोनों देशों के बीच ऊर्जा संबंधों में आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत रूस ऊर्जा सहयोग बढ़ता रहेगा। रूसी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि पश्चिमी शुल्कों और प्रतिबंधों के मद्देनजर तेल आयात कीमतों में पांच फीसदी का उतार चढ़ाव संभव है, हालांकि यह बातचीत का विषय होगा।

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