प्रयागराज समृद्धि न्यूज़।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला,
विक्रय करार होने मात्र से इच्छुक खरीदार को जमीन का मालिकाना हक नहीं मिल जाता,
हाईकोर्ट ने कहा करार केवल एक ऐसा दस्तावेज़ है,
जिसके आधार पर विक्रय विलेख प्राप्त करने का अधिकार मिलता है,
याची को विक्रय करार में गवाह के रूप में हस्ताक्षर करने के कारण फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोपी बनाया गया है,
याची के खिलाफ पूरक आरोपपत्र दाखिल किया गया है,
कोर्ट ने याची के खिलाफ दाखिल पूरक आरोपपत्र विधि विरूद्ध करार देते हुए किया रद्द,
कहा दस्तावेज पर गवाह के रूप में हस्ताक्षर करने मात्र से वह लाभार्थी नहीं माना जा सकता,
याची अजीत कुमार गुप्ता की ओर दाखिल की गई है याचिका,
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वह पिछले 11 वर्षों से यूएसए में रह रही है,
अजीत कुमार गुप्ता व सह अभियुक्त नरेन्द्र कुमार सिंह व कन्हैया गुप्ता ने भू माफिया की मदद से आनंदपुरी, ट्रांसपोर्ट नगर, कानपुर नगर स्थित उसके मकान पर कब्जा कर लिया है,
आरोपियों के खिलाफ कानपुर नगर के जूही थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई,
आरोप है कि याची व अन्य ने शिकायतकर्ता के मकान पर अपने अवैध कब्जे को सही ठहराने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए हैं,
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने कभी भी आरोपियों के पक्ष में किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर नहीं किए,
आरोप है कि उसका हस्ताक्षर डिजिटल रूप से बनाया गया हैं,
और फर्जी दस्तावेज तैयार किया गया है,
जानकारी होने पर इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को एक पत्र भेज कर की थी,
उसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी,
जस्टिस सिद्धार्थ की सिंंगल बेंच में हुई सुनवाई।
