यूपी में 13 लाख गाडिय़ों के चालान होंगे माफ

लखनऊ, समृद्धि न्यूज। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच कुल 30,52,090 ई-चालान काटे गए थे। इस निर्णय से लाखों वाहन मालिकों को राहत मिली है। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने वाहन मालिकों को बड़ी राहत देते हुए 13 लाख गाडिय़ों के चालान को माफ करने का फैसला लिया है।
उत्तर प्रदेश में अगर आप गाड़ी चला रहे और भारी-भरकम चालान कट गया है तो टेंशन लेने की कोई बात नहीं है। परिवहन विभाग ने ऐसे वाहन मालिकों को बड़ी राहत दी है। अब इन लोगों को चालान का एक रुपए भी नहीं देना होगा, परिवहन विभाग ने इनकी गाडिय़ों के काटे गए चालान को पूरी तरह से माफ कर दिया है। इस फैसले से यूपी में कुल 12.93 लाख लोगों को इसका फायदा मिलेगा। परिवहन विभाग ने चालान माफ करने का ये पूरा प्रोसेस शुरू कर दिया है। कुल 30 दिन का समय लगेगा, जिसके बाद चालान को लेकर टेंशन फ्री हो जाएंगे। अभी तक भारी भरकम चालान की वजह से वाहन मालिकों को अपने वाहनों सेल करने में प्रॉब्लम हो रही थी। कई-कई गाडिय़ां तो ऐसी थीं, जिन पर एक से दो लाख तक का चालान पेंडिंग था। ऐसे में इन गाडिय़ों को कोई खरीदता नहीं था। परिवहन विभाग के इस फैसले से वाहन मालिकों को फिटनेस, परमिट, वाहन ट्रांसफर और हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) जैसी परेशानियों से मुक्ति मिल जाएगी। परिवहन विभाग का प्रोसेस कंपलीट होने के बाद गाड़ी मालिक परिवहन पोर्टल पर अपनी चालान स्थिति की जांच भी कर सकेंगे।
परिवहन विभाग के अनुसार, 2017 से 2021 के बीच कुल 30, 52,090 ई-चालान काटे गए थे। इनमें से 12,93,013 लंबित थे, जबकि 17,59,077 पहले ही निस्तारित हो चुके हैं। इस निर्णय के बाद अब ये ई-चालान खुद ही निरस्त हो जाएंगे। इसके साथ ही एक महीने के भीतर सभी चालानों की स्थिति पोर्टल पर अपडेट कर दी जाएगी। जहां वाहन मालिक चालान का स्टेटस देख सकेंगे। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग का यह फैसला उन गाडिय़ों के चालानों को माफ करने के लिए लिया गया है, जो 31 दिसंबर 2021 तक कोर्ट में लंबित थे या जिनकी समय-सीमा पार हो चुकी थी और वे कोर्ट नहीं भेजे गए थे। परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह द्वारा आदेश में बताया गया कि यह फैसला जनहित, पारदर्शिता और कानून के पालन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, लंबे समय से कोर्ट में पड़े छोटे-मोटे चालानों से न्यायपालिका और प्रवर्तन तंत्र पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा था, इनकी वसूली लगभग असंभव हो चुकी थी।

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