कमालगंज, समृद्धि न्यूज। विकास खंड की ग्राम पंचायत पतौंजा में मनरेगा कार्यों में बड़े घोटाले की परतें खुलने लगी हैं। मंगलवार को कागज़ों में यहां 83 मजदूर कार्यरत दिखाए गए। जिनमें 18 महिलाएं भी शामिल बताई गईं। हैरानी की बात यह है कि जिस स्थल पर मिट्टी कार्य दिखाया गया है वहां ज़मीन पर काम न के बराबर नजऱ आया। ग्राम प्रधान आशीष कुमार से जब इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए कहा यह काम वन विभाग के अंतर्गत है। प्रधान का इससे कोई लेना देना नहीं है। जबकि हकीकत यह है कि मनरेगा कार्य ग्राम पंचायत की देखरेख और जिम्मेदार अधिकारियों की अनुमति से ही संचालित होते हैं। जब इस मामले पर एपीओ गौरव कुमार से फोन पर संपर्क किया गया, तो उन्होंने भी गेंद दूसरे पाले में डालते हुए कहा यह भूमि संरक्षण विभाग का कार्य है। वन विभाग का इससे कोई लेना देना नहीं है। वहीं ज़मीन पर दिखाए गए रिकॉर्ड के मुताबिक कार्य में रोड से कटियार के भ_े तक चक मार्ग पर मिट्टी डालने का था। सवाल यह उठता है कि आखिर इतने मजदूरों का भुगतान किस आधार पर किया गया। गांव के ग्रामीणों का कहना है कि पिछले पांच दिनों से लगातार 80 से ऊपर मजदूर चढ़ाए जा रहे हैं। यानी अब तक 400 से अधिक मजदूरों का भुगतान कागज़ों में दिखाया गया है, लेकिन सडक़ पर आज भी मिट्टी बढऩे का नाम नहीं ले रही। साफ है कि मजदूरों के नाम पर कागज़ी खानापूरी कर लाखों रुपये की बंदरबांट की जा रही है। सवाल यह है कि इस घोटाले में ग्राम प्रधान आशीष कुमार, पंचायत सचिव अमित शुक्ला, एपीओ गौरव कुमार और खंड विकास अधिकारी त्रिलोक चंद्र की भूमिका संदिग्ध क्यों न मानी जाए। आखिर इतने बड़े पैमाने पर फर्जी मजदूर चढ़ाने की जानकारी इनके संज्ञान में क्यों नहीं आई। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, वरना मनरेगा जैसे गरीब मजदूरों के हक़ की योजनाएं सिर्फ भ्रष्टाचार का अड्डा बनकर रह जाएंगी।
