बिना फिटनेस के फर्राटा भर रही करीब एक सैकड़ा एंबूलेंस

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। जिले की सडक़ों पर मरीजों को लेकर फर्राटा भर रही तकरीबन 100 से ज्यादा एंबुलेंस कंडम हो चुकी हैं। वहीं, कई एंबुलेंस बिना पंजीकरण ही फर्राटा भर रही हैं। इससे मरीजों व उनके तीमारदारों की जान को खतरा बना रहता है। उधर, सडक़ों पर दौड़ती एंबुलेंस की पुलिस व परिवहन विभाग के अफसर भी जांच करने से बचते हैं। ऐसे में एंबुलेंस संचालक भी मनमानी करते हैं।
जनपद में तकरीबन 800 एंबूलेंस फर्राटा भर रही हैं, जिसमें से एआरटीओ कार्यालय के अनुसार अनुसार करीब 90 एंबुलेंस पंजीकृत हैं। जो दिन भर मरीजों को लेकर सडक़ों पर दौड़ती रहती हैं। शासन की ओर से एंबुलेंस के कुछ मानक भी तय किए गए हैं, लेकिन जिले के अस्पतालों में जितनी एंबुलेंस चल रही हैं उनमें से अधिकांश के मानक ही पूरे नहीं हैं। कई एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर व अग्निशमन यंत्र नहीं हैं, तो अधिकांश में पैरामेडिकल स्टाफ भी मौजूद नहीं होता। वहीं कद्दछ एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलिंडर लगे हैं तो यह सिर्फ दिखावे के लिए ही है। अधिकांश एंबुलेंस खस्ताहाल हो चुकी हैं। इसके अलावा 100 से ज्यादा एंबुलेंस के फिटनेस सर्टिफिकेट ही नहीं है। इसके बाद भी यह दिन रात सडक़ों पर दौड़ रही हैं। साथ ही तीमारदारों से ज्यादा रुपये लिए जाते है। फिर भी जिम्मेदारों की ओर से कार्रवाई नहीं की जाती है।

ट्रैफिक इंचार्ज ने 20-25 एंबूलेंस के किये चालान

थाना कादरी गेट के आवास विकास के लोहिया अस्पताल के बाहर एम्बुलेंसों का अड्डा बना हुआ है। मरीजों को ले जाने वाली दर्जनों एम्बुलेंस खुद बीमार है। किसी के अभिलेख नहीं तो किसी की खुद फिटनेस खत्म हो चुकी है। केवल एम्बुलेंस होने का फायदा उठाकर सडक़ पर फर्राटा भर रही हैं। एम्बुलेंस चालक वर्षो से अड्डा जमाये हुए हैं। जिम्मेदार हाथ नहीं डालते हैं। वर्षों से इनके अभिलेखों का परीक्षण नहीं किया गया। यातायात प्रभारी सतेन्द्र कुमार ने बताया कि मामले पर जल्द कार्यवाही की जायेगी। अवैध रूप से एम्बुलेंसों का संचालन नहीं होने दिया जायेगा। वहीं दूसरी तरफ मौके पर पहुंचे कर ट्रैफिक इंचार्ज सतेंद्र कुमार ने लगभग 20 से 25 गाडिय़ों के चालान किए। ट्रैफिक इंचार्ज ने बताया कई गाडिय़ों में कमी मिली है। चालान की कीमत 2500 से लेकर 12500 तक बताई है।

जरूरी दवा और स्टाफ भी नहीं

नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही इन एंबुलेंस में न तो जीवन रक्षक दवाओं की व्यवस्था है और न ही प्रशिक्षित स्टाफ की। इतना ही नहीं इनकी निगरानी करने वाला स्वास्थ्य विभाग भी मौन साधे हुए है। जिसका कुप्रभाव मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ रहा है। स्थिति यह है कि नौसिखिया एंबुलेंस चालक गंभीर मरीजों को ढोते नजर आ रहे हैं। जबकि नेशनल हेल्थ मिशन और परिवहन विभाग की तरफ से बनाए गए नियमों को ताक पर रखकर जिलेभर में निजी एंबुलेंस संचालित की जा रही हैं।

एंबुलेंस फिटनेस के लिए यह जरूरी

वाहनों की फिटनेस का प्रमाण पत्र मानकों की पड़ताल के बाद आरआई की ओर से जारी किया जाता है। इसके लिए जरूरी दवा सहित ऑक्सीजन की पड़ताल नहीं हो पाती थी। वहीं एंबुलेंस पर ईएमओ है या नहीं इसकी जांच नहीं की जाती थी। ऐसे में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर जिले में एंबुलेंस को फिटनेट प्रमाण पत्र देने के पहले एआरटीओ की ओर से एक आवश्यक रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय से ली जाती है। सीएमओ कार्यालय में तैनात संबंधित नोडल अधिकारी की संस्तुति के बाद ही फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है।

40 फीसदी एंबुलेंस 10 साल से ज्यादा हैं पुरानी

एआरटीओ के यहां पंजीकृत 700 एंबुलेंस में से 40 फीसदी 10 साल पुरानी हैं। इनको नियमानुसार हर साल एआरटीओ के यहां फिटनेस करानी होती है। इसमें धुआं जांच के अलावा वाहन की मौजूदा हालत भी परखी जाती है। चिकित्सकीय उपकरण समेत चालक के लाइसेंस समेत अन्य की भी जांच की जाती। मानक नहीं होने और खटारा हाल में एंबुलेंस होने के कारण चालक इनका फिटनेस कराने नहीं आ रहे हैं।

एंबुलेंस के मानक

एंबुलेंस में मरीज के लिए प्राथमिक उपचार की व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और जरूरी दवा उपलब्ध हों।
प्राथमिक उपचार, स्ट्रेचर, कार्डियक मॉनीटर, बीपी मॉनीटर और ऑक्सीजन मशीनों का जानकार हो।
खुलने बंद होने वाली खिड़कियां, थर्मो इलेक्ट्रिक कूलर और दो ऑक्सीजन सिलिंडर होने चाहिए।
इलेक्ट्रॉनिक सायरन होना चाहिए।
एंबुलेंस में मरीज होने कारण मानवता के नाते कार्रवाई नहीं हो पाती है। सडक़ पर खाली एंबुलेंस मिलती नहीं हैं। अगर एंबुलेंस पर कार्रवाई करने की कोशिश की जाती है तो मरीज और तीमारदार हंगामा करने लगते हैं। जिन एंबुलेंसों की फिटनेस नहीं हुई है उनके मालिकों को नोटिस जारी किए जाते हैं।

सुभाष, एआरटीओ

बिना फिटनेस एंबुलेंस पर कार्रवाई करना परिवहन विभाग और पुलिस का काम है। इससे हमारा कोई लेना देना नहीं हैं। ऐसे अस्पताल या एंबुलेंस पर कार्रवाई करने में परिवहन विभाग को मदद की जरूरत है तो हम तैयार हैं। हमारी 102 और 108 वाली सभी एंबुलेंस की फिटनेस है।
डॉ0 अवनींद्र सिंह (सीएमओ)

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