समृद्धि न्यूज। बिजनौर में डीएम आवास को कुर्क करने के आदेश दिया गया है। इस आदेश ने अफरातफरी मचा दी है। मुरादाबाद स्थित न्यायालय भूमि अर्जन पुनर्वासन व पुनव्र्यवस्थापन प्राधिकरण ने सिंचाई विभाग से संबंधित एक प्रकरण में जमीन अधिग्रहण होने के बाद भी मुआवजे का भुगतान न किए जाने के मामले में डीएम आवास कुर्क करने के आदेश किए थे। मुरादाबाद की लारा कोर्ट ने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे का भुगतान न करने पर बिजनौर के डीएम के आवास को कुर्क करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही नौ जनवरी को डीएम को तलब किया है। कोर्ट ने माना कि डिक्री के बावजूद चार वर्षों से भुगतान नहीं किया गया। अदालत में वादी उमेश के अधिवक्ता ने बताया कि जमीन के मुआवजा के मामले में डीएम बिजनौर की ओर से कोई आख्या प्रस्तुत नहीं की गई। इस मामले में एक प्रार्थनापत्र प्रस्तुत करते हुए बताया गया कि 13 मार्च 2020 को मुआवजा देने के बारे में निर्णय पारित हुआ था। शासन धनराशि अदा करने में समक्ष है। भूलवश उसने ट्रेजरी कार्यालय में कुछ शब्द अंकित कर दिया था। इस मामले में डीएम आवास कुर्क कराकर वादी को धनराशि दिलाया जाना आवश्यक है। वादी की ओर से यह अनुरोध किया गया कि डीएम बिजनौर के आवास को कुर्क कर धनराशि का भुगतान कराया जाए। यह मुकदमा चार वर्षों से विचाराधीन है। उच्चतम न्यायालय के राजामणि के निर्णय का हवाला देते हुए तर्क दिया गया। बताया गया कि प्रत्येक निष्पादन वाद छह माह के अंदर निस्तारित होना चाहिए। बताते चले कि सिंचाई खंड बिजनौर ने ग्राम इब्राहीपुर कुम्हारापुरा निवासी उमेश कुमार की 1.165 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। इस भूमि के मुआवजे के रूप में 25 लाख 23 हजार 973 रुपये की धनराशि बकाया थी। भुगतान संबंधी कोई कार्रवाई नहीं होती देख उमेश ने मुरादाबाद स्थित न्यायालय भूमि अर्जन पुनर्वासन एवं पुनव्र्यवस्थापन प्राधिकरण में वाद दायर कर दिया। दायर वाद में कहा गया था कि 13 मार्च 2020 मुआवजा देने का आदेश हुआ था। इसके बाद भी जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे का भुगतान नहीं किया। हालांकि जिला प्रशासन मुआवजे का भुगतान करने में सक्षम है। परेशान होकर वादी उमेश ने डीएम आवास को कुर्क कराकर मुआवजा की धनराशि दिलाए जाने का अनुरोध किया।
कोर्ट ने जिलाधिकारी के आवास की कुर्की का दिया आदेश
