शाहाबाद/हरदोई। श्री बाल रामलीला नाट्य कला मंदिर, चौक में रामलीला का मंचन एक बार फिर से दर्शकों के लिए एक अनोखा अनुभव लेकर आया। गोवर्धन, मथुरा से आये मेहमान कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए फुलवारी, धनुष यज्ञ, परशुराम लक्ष्मण संवाद लीला मंचन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लीला का शुभारंभ पूर्व विधायक आसिफ खां बब्बू और मेला समिति पदाधिकारियों के गणेश पूजन के बाद हुआ।
पूर्व विधायक का स्वागत मेला कमेटी के लोगों ने दिल खोल कर किया, पूर्व विधायक आसिफ खां बब्बू ने अपने संबोधन से पहले कमेटी का आभार जताया, कहा तन मन धन से वे इस रामलीला के लिए जुड़े रहेंगे। पूर्व विधायक ने कहा कि रामलीला संस्कृति, संस्कार और आस्था का प्रतीक है और ऐसे आयोजन से समाज में सद्भभावना, भाईचारे और एकता का संदेश देते है।
पूर्व विधायक बब्बू ने ऐतिहासिक मेला मंच से घोषणा करते हुए कहा, कि मै पालिकाध्यक्ष प्रतिनिधि होने के नाते इस मंच से घोषणा करता हूं कि नगर के मुख्य मार्गों का निर्माण दिवाली से पहले हो जाएगा। अभी तक वाटर लाइन पड़ने के कारण इन सड़कों का निर्माण रुका हुआ था जिससे लोगों को समस्याएं आ रही है। अब मुख्य मार्ग घंटाघर से बेझा रोड और चौक से महुआटोला तक रोड निर्माण दशहरे तक कराने का प्रयास है और दीपावली से पहले रोड निर्माण कार्य पूरे हो जायेगे। आपकी सुविधा हमेशा हमारा संकल्प रहा है और आपका हमारा यह विश्वास हमेशा ही कायम रहेगा। संबोधन बाद मेला टीम ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।
लीला क्रम में राजा जनक द्वारा आयोजित धनुष यज्ञ में देश देशांतर के सभी राजा-महाराजाओं को आमंत्रित किया जाता है, आये राजाओं द्वारा धनुष भंग करने के लिए अपना असफल प्रयास किए गए। इससे राजा जनक बहुत दुखी हुए और विलाप करते हुए कहने लगे कि शायद धरती वीरों से विहीन हो गई है, अब सीता का विवाह किससे होगा। यह सुनते ही लक्ष्मण जी क्रोधित हो गए और कहा आपकी सभा में सूर्यवंशी, रघुवंशी प्रभु श्रीराम बैठे हैं। आप ऐसा कहकर हमारे सूर्यवंश का अपमान कर रहे हैं। अंत में प्रभु श्रीराम जी के समझाने पर लक्ष्मण जी शांत हुए और गुरु विश्वामित्र जी की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम जी ने शिव धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाकर झट से तोड़ दिया और देवलोक से देवताओं द्वारा पुष्पवर्षा कर मंगलकामना की गई। इसी के साथ माता सीता ने प्रभु श्रीराम जी के गले में वरमाला पहनाई और दर्शकों ने सियावर रामचन्द्र जी के देर तक जयकारे लगाए।
शिव धनुष टूटते ही क्रोधित परशुरामजी जनक की सभा में आ धमकते है, वे धनुष भंग करने वाले को भला बुरा कहने लगते हैं तब लक्ष्मण से रहा नहीं जाता और फिर वे परशुराम का मजाक उड़ाते हुए उन्हें कटु वचनों में शिक्षा देने लगते हैं। प्रभु श्रीराम लक्ष्मण का क्रोध शांत करते है। श्री रघुनाथ जी के वचन सुनकर परसुरामजी की बुद्धि के परदे खुल गए, वो समझ गए कि इस शिव धनुष को तोड़ने वाला कोई साधारण पुरुष नहीं हो सकता तब उनकी समझ में आया कि यह तो साक्षात प्रभु राम है। परशुरामजी बोले प्रभु, क्षमा करना, मुझसे भूल हो गई, मैंने अनजाने में आपको बहुत से अनुचित वचन कहे, मुझे क्षमा कीजिए।
चौक मेलाध्यक्ष चौधरी उमेश गुप्ता ने मुख्य अतिथि का मेला प्रति समर्पण को एक बार फिर मंच से धन्यवाद अदा किया, और आयोजन की सफलता के लिए सभी कलाकारों और आयोजकों को आभार जताया। इस अवसर पर मेला कमेटी के सभी पदाधिकारी व सदस्य सहित सैकड़ों की संख्या में दर्शक उपस्थित रहे।
