वर्ष १९९३ से २००० के मध्य नियुक्त तदर्थ शिक्षकों का शिक्षा निदेशक ने मांगा ब्योरा
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष १९९३ से २००० के मध्य नियुक्त हुए तदर्थ (एडाक) शिक्षकों का विनियमितीकरण प्रकरण निस्तारण हेतु शिक्षा निदेशक ने संयुक्त शिक्षा निदेशक से सूचना मांगी है। सर्वोच्च न्यायालय में योजित विशेष अनुज्ञा याचिका में पारित आदेश अगस्त २०२३ के अनुपालन में ७ अगस्त १९९३ से ३० दिसम्बर २००० तक नियुक्त तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण के प्रकरण का धारा-३३(जी) के अन्तर्गत विभागीय नियम/विनियमों के तहत नियमानुसार निस्तारण किया जाना है। दरअसल शासन सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत वर्ष जुलाई १९९३ तक के तदर्थ शिक्षकों को विनियमिती कर चुका है। उसके पश्चात नियुक्त तदर्थ शिक्षकों का विनियमितीकरण नहीं हुआ है, परन्तु उन्हें पूरा वेतन मिल रहा है। ऐसे शिक्षकों की संख्या लगभग पूरे प्रदेश में ११३५ है। न्यायालय के आदेश के पश्चात ७ अगस्त १९९३ से ३० दिसम्बर २००० के मध्य नियुक्त तदर्थ शिक्षकों का विनियमितीकरण किया जायेगा। बीस से तीस वर्ष की सेवा कर चुके विनियमितीकरण से वंचित शिक्षकों में खुशी की लहर है। प्रदेश के शिक्षा निदेशक के निर्देश सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर अपने-अपने जनपदों में वर्ष १९९३ से २००० के मध्य नियुक्त हुए तदर्थ शिक्षकों का ब्योरा भेजने के निर्देश दिये है।उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षक संघ की प्रदेश कार्य समिति के सदस्य लालाराम दुबे एवं नरेन्द्र पाल सिंह सोलंकी ने तदर्थ शिक्षकों का विनियमितीकरण किये जाने पर सरकार के इस फैसले की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार को यह कदम बहुत पहले उठा लेना चाहिए था क्योंकि विनियमितीकरण किये जाने से राजकोष पर अतिरिक्त आर्थिक भार नहीं पड़ेगा। शिक्षक नेताओं ने शासन से मांग की है कि वर्ष १९९३ से पहले के कुछ शिक्षक जिनका न्यायालय से अंतिम आदेश १९९३ के बाद होने के कारण उनका भी विनियमितीकरण अभी नहीं हुआ है। अत: वर्ष १९९३ से पूर्व नियुक्त ऐसे तदर्थ शिक्षकों का भी विनियमितीकरण किया जाये।
