समृद्धि न्यूज। इंडिया गठबंधन के सांसद एसआईआर और कथित वोट चोरी के खिलाफ संसद भवन से चुनाव आयोग दफ्तर तक अपना मार्च निकाला। मार्च में 300 से भी ज्यादा सांसदों ने हिस्सा लिया है। विपक्ष के मार्च के दौरान समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पुलिस बैरिकेड के ऊपर से कूद गए और बीच सकड़ पर धरने पर बैठ गए।
इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी नारेबाजी करती नजर आईं। विपक्षी गठबंधन (इंडिया) के नेता बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान मतदाता धोखाधड़ी के आरोपों के विरोध में संसद से भारत के चुनाव आयोग तक मार्च निकाल रहे थे। इस मार्च में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और कई अन्य दलों के नेता शामिल हुए। सांसदों ने सिर पर सफेद रंग की टोपी पहन रखी है, जिस पर एसआईआर और वोट चोरी लिखा है तथा उन पर लाल रंग के क्रॉस का निशान भी है। मार्च शुरू होने से पहले दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि किसी ने भी इस प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं मांगी है।
#WATCH | Delhi: Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav jumped over a police barricade as Delhi Police stopped INDIA bloc leaders marching from the Parliament to the Election Commission of India to protest against the Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls in poll-bound… pic.twitter.com/ddHMdwWPqs
— ANI (@ANI) August 11, 2025
बिहार में मतदाता सूची संशोधन के विरोध में विपक्षी सांसदों ने संसद भवन से चुनाव आयोग कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। इस दौरान प्रदर्शनकारी विपक्षी सांसदों को रोकने के लिए परिवहन भवन में पुलिस बैरिकेड्स लगा दिए। यहां उन्हें चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर आगे बढऩे से रोक दिया गया। पुलिस का कहना था कि विपक्षी सांसदों की ओर से इस मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
पुलिस की ओर से रोके जाने के बाद अखिलेश यादव, महुआ मोइत्रा समेत कई सांसदों ने बैरिकेड्स पर चढऩे की कोशिश की। कुछ सांसद बैरिकेड्स कूदकर बीच सडक़ पर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सांसदों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब सांसदों ने सडक़ से हटने से इनकार किया तो राहुल-प्रियंका गांधी समेत तमाम नेताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया, लेकिन बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।
#WATCH | Delhi: Lok Sabha LoP and Congress MP Rahul Gandhi says, "The reality is that they cannot talk. The truth is in front of the country. This fight is not political. This fight is to save the Constitution. This fight is for One Man, One Vote. We want a clean, pure voters… pic.twitter.com/Aj9TvCQs1L
— ANI (@ANI) August 11, 2025
बताते चले कि राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूची में कथित धांधली का आरोप लगाए जाने और इस संबंध में कुछ खुलासे करने का दावा किए जाने के बाद विपक्षी दलों का यह पहला विरोध प्रदर्शन है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बेंगलुरु के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े सामने रखते हुए 7 अगस्त को आरोप लगाया था कि मतदाता सूची में हेरफेर करके वोट चोरी का मॉडल भारतीय जनता पार्टी को फायदा पहुंचाने के लिए लागू किया गया है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि बेंगलुरु मध्य लोकसभा सीट के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में 1,00,250 मतों की चोरी की गई, जबकि यह सीट पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 32,707 मतों के अंतर से जीती थी।
चुनाव आयोग ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश को पत्र लिखकर दोपहर 12:30 बजे मिलने के लिए बुलाया था। चुनाव आयोग ने उनसे 30 सांसदों के साथ आने को कहा था और आनेे से पहले उन सांसदों की सूचना देने की बात कही थी। इसी के मद्देनजर पुलिस ने प्रदर्शनकारी सांसदों से कहा कि 30 लोग चुनाव आयोग के दफ्तर तक जा सकते हैं। इसके लिए पैदल या वाहन जैसे विकल्प चुन सकते हैं। हालांकि, विपक्ष इसके लिए तैयार नहीं हुआ। पुलिस ने यह भी बताया कि मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इससे पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारी सांसदों को आगे बढऩे से रोकने के लिए संसद मार्ग पर परिवहन भवन के पास व्यापक व्यवस्था की थी। इस दौरान बैरिकेड्स लगाए गए थे। पुलिस ने सांसदों से आगे न बढऩे को कहा। इस दौरान लाउडस्पीकर से घोषणा की गई। उन्हें संसद भवन से कुछ ही दूरी पर स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर बढऩे से रोका गया।
