समृद्धि न्यूज। बुधवार को योगी सरकार ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया। इन परीक्षाओं के संबंध में अनियमितताओं की जानकारी सरकार को प्राप्त हुई थीं जिससे इस परीक्षा को निरस्त कर दिया गया। सरकार ने धांधली के आरोप लगने के बाद इस परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एसटीएफ को उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज द्वारा विज्ञापन संख्या 51 के अंतर्गत सहायक आचार्य पद हेतु अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा के संबंध में अनियमितताओं, धांधली और अवैध धन वसूली से जुड़ी सूचनाएं प्राप्त हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गोपनीय जांच के आदेश दिए गए। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर कार्रवाई करते हुए दिनांक 20 अपै्रल 2025 को एसटीएफ ने असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से ठगी करने वाले गैंग के तीन अभियुक्तों गोंडा के लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज के सहायक प्रोफेसर बैजनाथ पाल, उसके भाई विनय कुमार और अयोध्या निवासी महबूब अली को गिरफ्तार किया था। आरोपियों पर परीक्षा में धांधली एवं अवैध धन वसूली के आरोप लगे हैं। एसटीएफ की जांच में सामने आया था कि इन सभी ने परीक्षा के प्रश्न पत्रों को लाखों रुपये में बेचा है। प्रकरण का संज्ञान मुख्यमंत्री ने लेकर एसटीएफ को जांच का आदेश दिया था। एसटीएफ ने महबूब अली के पास से बरामद डाटा का विश्लेषण किया और मोबाइल नंबरों का विवरण जुटाया। इस डाटा का आयोग के डाटा से मिलान कराया गया, जिसमें पुष्टि हुई कि परीक्षा की पारदर्शिता व शुचिता भंग हुई है। इसलिए प्रदेश सरकार ने परीक्षा को निरस्त करने का निर्णय लिया।
यूपी में असिस्टेंट प्रोफेसर की परीक्षा निरस्त
