फर्जी प्रमाणपत्र से हासिल की थी नौकरी: सहायक अध्यापक बर्खास्त, बीएसए ने कराई एफआईआर

हरदोई से संतोष तिवारी की रिपोर्ट,
हरदोई। जिले के शिक्षा विभाग में एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। प्राथमिक विद्यालय में तैनात सहायक अध्यापक सूरज पाल को फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पाने के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। इस मामले में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) विजय प्रताप सिंह ने गंभीर कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

जानकारी के अनुसार, सूरज पाल ने नियुक्ति के समय बी.ए. (सन् 2005) और बी.एड. (सन् 2006) के प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए थे। विभाग को संदेह होने पर इन प्रमाणपत्रों का सत्यापन लखनऊ विश्वविद्यालय से कराया गया। विश्वविद्यालय की ओर से आई रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि सूरज पाल द्वारा प्रस्तुत दोनों डिग्रियां फर्जी हैं। रिपोर्ट मिलने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और आरोपी अध्यापक पर कठोर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई।

बीएसए विजय प्रताप सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल प्रभाव से सूरज पाल की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया। इसके साथ ही अब तक प्राप्त सभी वेतन और भत्तों की रिकवरी (वसूली) के निर्देश भी दिए गए हैं। विभाग की शिकायत पर संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

बीएसए ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी हासिल करना न केवल अनैतिक है, बल्कि यह एक दंडनीय अपराध भी है। शिक्षा विभाग ने ऐसे सभी मामलों के प्रति शून्य सहनशीलता (Zero Tolerance) की नीति अपनाई है। उन्होंने कहा कि विभाग में पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी स्तर पर गड़बड़ी करने वाले कर्मचारियों को बख्शा नहीं जाएगा।

अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी शिक्षक या कर्मचारी के प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी पाई गई, तो उनके खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए सभी विद्यालयों से शिक्षकों के दस्तावेजों का पुनः सत्यापन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

विभागीय सूत्रों के अनुसार, शिक्षा विभाग ने जिलेभर में प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। कई शिक्षकों के दस्तावेज सत्यापन के लिए विश्वविद्यालयों को भेजे गए हैं। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभाग में केवल योग्य और सत्य प्रमाणपत्र वाले ही अध्यापक कार्यरत रहें।

यह मामला न केवल विभाग की साख से जुड़ा हुआ है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के भविष्य पर भी सीधा असर डालता है। बीएसए ने कहा कि इस तरह के फर्जीवाड़े से शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचता है और वास्तविक रूप से योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन होता है।

इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और अन्य शिक्षकों में भी दस्तावेजों को लेकर हलचल तेज हो गई है। विभाग ने स्पष्ट संदेश दिया है कि फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।

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