फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। आर्य प्रतिनिधि सभा के तत्वावधान में मेला श्रीरामनगरिया में चल रहे वैदिक क्षेत्र में चरित्र निर्माण शिविर में प्रात:काल यज्ञ किया गया। आचार्य चन्द्रदेव शास्त्री ने कहा कि शरीर की पवित्रता जल से होती है, मन की पवित्रता सत्य से होती है, बुद्धि की शुद्धि ज्ञान से होती है और आत्मा की पवित्रता विद्या और तप से होती है। यदि शरीर पर ध्यान दिया तो स्वास्थ्य बहुत अच्छा रहेगा। महाकवि कालिदास ने लिखा है कि शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनं अर्थात शरीर ही धर्म का पहला और उत्तम साधन है व शरीर ही धर्म को जानने का पहला साधन है। ईश्वर ने हमें साध्य की सिद्धि के लिए शरीर को साधन के रूप में दिया है। इसलिए शरीर रूपी साधन को स्वस्थ रखने के लिए मनुष्य को पुरुषार्थी होना चाहिए। मन की पवित्रता सत्याचरण से होती है।
सत्य बोलने से आत्मा का बल बढ़ता है। सत्यवादी व्यक्ति का विश्वास शत्रु भी करते हैं, जबकि असत्यवादी व्यक्ति का विश्वास अपने भी नहीं करते। बुद्धि की पवित्रता ज्ञान से होती है, बुद्धि की शुद्धि से ही ईश्वर की सिद्धि सम्भव है। इस धरती पर जितने प्राणी हैं उन सभी प्राणियों में शारीरिक रूप से मनुष्य सबसे कमजोर प्राणी है, इसके पश्चात भी बुद्धि के बल पर मनुष्य ने सारी दुनियां को वश में कर रखा है। आत्मा की उन्नति विद्या एवं तप से होती है। तप के द्वारा विद्या अर्जन करना ही आत्मोन्नति है। पण्डित धर्मवीर शास्त्री ने भक्ति में मन, परहित में तन जब तेरा हो जाएगा, तब तुझे खुद ही के अंदर परमात्मा मिल जाएगा। भजन के द्वारा सभी को भक्ति और आनंद से सराबोर कर दिया। संदीप आर्य ने बताया कि 8 फरवरी को दोपहर 2 बजे से वैदिक क्षेत्र में महिला सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। जिसमें अनेक सामाजिक संगठन की मातृशक्ति भाग लेंगी। सभा में उत्कर्ष आर्य, मंगलम आर्य, डॉ0 सत्यम आर्य, उदयराज आर्य, हरिओम शास्त्री, शिशुपाल आर्य, अजीत आर्य, रत्नेश द्विवेदी, उपासना कटियार, उदिता आर्या, अमृता आर्या आदि उपस्थित रहे।
शरीर की जल से व मन की पवित्रता सत्य से होती है: चन्द्रदेव शास्त्री
