उसरई में पेंटेड स्टॉर्क संरक्षण को लेकर समुदाय की सराहनीय पहल

ग्रामीणों को घोंसला निगरानी का प्रशिक्षण, जागरूकता कार्यक्रम और परामर्श आयोजित

सैफई : तहसील क्षेत्र के ग्राम उसरई में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में एक सार्थक और प्रेरणादायक पहल की गई। द हैबिटैट्स ट्रस्ट के सहयोग से पेंटेड स्टॉर्क के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा को लेकर समुदाय आधारित कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भागीदारी की।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को पेंटेड स्टॉर्क के घोंसलों की निगरानी, प्रजनन काल में अंडों और बच्चों की सुरक्षा तथा नियमित अवलोकन से जुड़ी व्यवहारिक जानकारी दी गई। उन्हें यह भी समझाया गया कि किस प्रकार घोंसला निगरानी से संबंधित विवरण को लिखित रूप में सुरक्षित रखा जाए, ताकि संरक्षण कार्यों को निरंतर और प्रभावी बनाया जा सके।
इस अवसर पर विशेषज्ञ व्याख्यान में डॉ. मनोज सिंह ने पेंटेड स्टॉर्क के पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह पक्षी आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने घोंसला स्थलों की संवेदनशीलता, प्रजनन काल में सावधानियों और संरक्षण के सरल उपायों की जानकारी दी।
ग्रामीणों को संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए गांवों में नुक्कड़ नाटकों का आयोजन भी किया गया। इन नाटकों के माध्यम से पेंटेड स्टॉर्क संरक्षण, आर्द्रभूमि बचाने और मानव तथा वन्यजीवों के सहअस्तित्व का संदेश प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। साथ ही परियोजना दल ने गांवों में भ्रमण कर लोगों से संवाद किया और संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित किया। इसी क्रम में पेंटेड स्टॉर्क संरक्षण को लेकर हितधारक परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें उसरई और फरहदपुरा गांवों के ग्रामीणों, विद्यार्थियों तथा वन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला में पेंटेड स्टॉर्क के घोंसला स्थलों की सामूहिक सुरक्षा, प्रजनन काल में सतर्कता और दीर्घकालिक संरक्षण के उपायों पर विचार-विमर्श किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण में शिक्षा, प्रशासन और समाज की संयुक्त भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. उलमन यश्मिता नितिन और उनकी टीम ने परियोजना की प्रगति की जानकारी दी। उन्होंने ग्रामीणों को आवास संरक्षण के साथ-साथ प्रजनन काल के दौरान आर्द्रभूमि संसाधनों पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक आजीविका के उपाय अपनाने के लिए प्रेरित किया।
वन विभाग की ओर से ग्रामीणों से अपील की गई कि यदि कहीं भी पक्षियों को नुकसान, चोट या शिकार की सूचना मिले तो तत्काल विभाग को अवगत कराएं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों का शिकार दंडनीय अपराध है और संरक्षण के प्रयासों में विभाग ग्रामीणों को पूरा सहयोग देगा। कार्यक्रम में चौधरी नाथू सिंह इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य कमलेश कुमार, चौधरी नाथू सिंह डिग्री कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज श्रीवास्तव, ग्राम पवन यादव, रितु यादव और अभिनव यादव तथा वन विभाग से वन दरोगा श्रीनिवास पांडेय उपस्थित रहे।

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