सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दलित संगठनों ने किया भारत बंद का आह्वान

बोले इस निर्णय से केंद्र व राज्य सरकारों के बीच मतभेद की स्थिति उत्पन्न होगी
संगठनों ने महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन अपर जिलाधिकारी को सौंपा
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। बहुजन समाज पार्टी ने महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एडीएम सुभाषचंद्र प्रजापति को सौंपा। जिसमें कहा गया है कि 1 अगस्त 2024 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससी/एसटी आरक्षण के उपवर्गीकरण पर दिये गये फैसले से देश में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोगों को पुन: उपवर्गीकृत किये जाने की मान्यता प्रदान की गयी है। उक्त निर्णय से बहुजन समाज पार्टी सहमत नहीं है। इस संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट द्वारा देवेंद्र सिंह बनाम पंजाब राज्य मामले में पारित इस आदेश के अनुसार अब राज्य सरकारें अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के भीतर उपवर्गीकरण अर्थात नई सूची बना सकेंगी, जिनमें अनेकों समस्यायें उत्पन्न होंगी। कार्यक्रम स्थल पर पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी भी फोर्स के साथ डटे रहे।
फतेहगढ़ के जय नरायन वर्मा रोड तिराहा स्थित अम्बेडर मूर्ति पर आरक्षण के विरोध में भारत बंद कार्यक्रम के दौरान काफी संख्या में लोग एकत्रित हुए। यहां पर भारी मात्रा में पुलिस फोर्स तैनात किया गया था। किसी को भी आगे नहीं जाने दिया। यहां पर पहुंचे अपर जिलाधिकारी सुभाषचंद्र प्रजापति को दिये गये ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 अगस्त 2024  से 20 वर्ष पूर्व 2004 को दिये गये निर्णय ई.वी. चिलैया बनाम आंध प्रदेश राज्य में दिये गये फैसले को पलट दिया है। जिस आदेश में अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों के भीतर किये जाने वाले वर्गीकरण की मान्यता देने से इन्कार कर दिया था और यह भी कहा था कि अनुसूचित जातियों/अनुसूचित जनजातियों के भीतर उपवर्गीकरण नहीं किया जा सकता है, क्योंकि एक ही समरुप अर्थात समान वर्ग में आते हैं। साथ ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह भी कहा गया था कि चूंकि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के लोगों ने जो अत्याचार सहे हैं वह एक वर्ग व एक समूह के रुप में सहे हैं तथा यह एक बराबर का वर्ग है। जिसके भीतर किसी प्रकार का वर्गीकरण करना उचित नहीं होगा। कोर्ट द्वारा 2004  के अपने निर्णय द्वारा समानता के अधिकार का उल्लंघन करने के आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा पारित आंध्र प्रदेश अनुसूचित जाति (आरक्षण का युक्तिकरण) अधिनियम 2000 को भी रद्द कर दिया था। अपने 2004  के के निर्णय में सुप्रीम कोर्ट यह भी माना था की यह वर्गीकरण इन जातियों के भीतर अलग-अलग व्यवहार करके समानता के अधिकार का उल्लंघन करेगा, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के सात सदस्यीय न्यायाधीशों की पीठ ने पुरान २००४ के पाँच सदस्यीय पीठ के फैसले को पलट दिया है। जिससे अनेकों मतभेद उत्पन्न हो गये हैं। इस निर्णय से केंद्र एवं राज्य सरकारों के बीच मतभेद की स्थिति उत्पन्न होगी, क्योंकि अभी तक केवल संसद के पास ही किसी भी जाति को अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति में सम्मिलित करने का या बाहर करने का अधिकार था। जिसे महमहिम राष्ट्रपति द्वारा अपने आदेशों द्वारा क्रियान्वित किया जाता है और जिसी बदलने का किसी भी राज्य सरकार को अधिकार नहीं है, लेकिन इस निर्णय के बाद से जो पार्टी सत्ता में होगी वह अपनी-अपनी राजनीति के हिसाब से अदलती बदलती रहेगी। इस आदेश से ऐसी अनेक समस्यायें उत्पन्न होंगी जिसके कारण एससी/एसटी को मिल रहा आरक्षण ही समाप्त हो जायेगा। महामहिम राष्ट्रपति संसद का विशेष सत्र बुलाकर पीठ द्वारा दिये गये निर्णय को निरस्त कराने एवं आरक्षण के मूल स्वरुप जो कि 01.08.2024 से पहले लागू था उस स्वरुप में बहाल कराने एवं एससी/एसटी के आरक्षण में राजनीतिक द्वेष के कारण बार-बार जो छेड़छाड़ की जाती है आरक्षण को संविधान की नौवीं सूची में दर्ज करायें। जिससे एससी/एसटी वर्ग को न्याय मिल सके। इस मौके पर सपा के प्रदेश सचिव सर्वेश अम्बेडकर, जवाहर सिंह गंगवार अध्यक्ष बार एसोसिएशन, विजय कुमार भास्कर सेक्टर इंचार्ज कानपुर मण्डल, रामरतन गौतम जिला प्रभारी, आर0डी0 बौद्ध जिलाध्यक्ष, शब्बीर मंसूरी जिला उपाध्यक्ष, देशराज शाक्य महासचिव, राजेश कठरिया जिला सचिव, सीताराम गौतम, प्रेमसागर दिवाकर, प्रताप नारायन पूर्व जिलाध्यक्ष, अजय भारती पूर्व जिलाध्यक्ष, रामशरण रमन, शिवकुमार गौतम, अमित गौतम पूर्व मण्डल प्रभारी, धर्मेन्द्र राणा, प्रभूदयाल, रवि गौतम, विजय गौतम, उपेन्द्र लोधी, देव नारायन गौतम, अखिलेश भास्कर, तरुपेश कुमार, सुरजीत बाबू , अर्जुन गौतम, योगेन्द्र सिंह, रामऔतार गौतम, अहिवरन लोधी, मनोज सत्यार्थी, रूपलाल वर्मा, विश्राम सिंह एवं सैकड़ों बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता उपस्थित रहे। इस दौरान सुरक्षा की दृष्टि से सीओ प्रदीप सिंह, कोतवाल व भारी पुलिस फोर्स मौजूद रहा।
आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) ने अपर जिलाधिकारी सुभाषचंद्र प्रजापति को दिये गये ज्ञापन में कहा है कि संविधान में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए अनुच्छेद ३४० की धारा १५-४ एवं १६-४ में स्पष्ट रुप से सामाजिक एवं आर्थिक रुप से कमजोर व्यक्तियों के लिए आरक्षण का प्रावधान किया गया है, परन्तु आज तक किसी भी सरकारी विभाग में पूर्ण रुप से आरक्षण का कोटा पूरा नहीं किया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से अनुसूचित जाति एवं जनजाति को काफी नुकसान होगा। जातिगत आधार पर लोगों में बंटवारा होगा, द्वेष भावना पैदा होगी। फिर भी आरक्षण का लाभ पूर्ण रुप से इन जातियों को नहीं मिलेगा। इस मौके पर जिलाध्यक्ष नितिन कुमार गौतम, जिला प्रभारी संजीव सिंह सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसके अलावा भीम आर्मी भारत एकता मिशन फर्रुखाबाद ने भी एडीएम को सौंपा है। इस मौके पर जिलाध्यक्ष व अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। भारतीय बौद्ध महासभा ने भी एडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर वीर सिंह अम्बेडकर, कर्मवीर सिंह, रिंकू जाटव आदि पदाधिकारी मौजूद रहे। आरक्षण समर्थक संयुक्त मोर्चा फर्रुखाबाद ने भी इस मौके पर एडीएम को ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर सुशील कुमार, सुमित, अनुपम, प्रवीन, पुरुषोत्तम पूजा कठेरिया आदि मौजूद रहे।

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