समृद्धि न्यूज। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों (मुरिदके, बहावलपुर) पर सटीक हमले कर 100 से अधिक आतंकियों को मार गिराया। सैटेलाइट तस्वीरों से तबाही के सबूत भी मिले हैं। डीजीएमओ ने कहा कि 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में जो आतंकी हमला हुआ, वह पूरी तरह प्रायोजित था और बेहद कू्ररता से अंजाम दिया गया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकियों ने एलओसी पार से आकर 26 निर्दोष पर्यटकों को मार डाला। आतंकियों ने उन्हें उनकी पहचान कर, धर्म पूछ कर, उनके परिवार और प्रियजनों के सामने गोली मारी। इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई अनिवार्य थी। जनरल घई ने बताया, अगर हम मुरिदके की बात करें यह लश्कर-ए-तैयबा का मुख्य आतंकी अड्डा है। स्क्रीन पर दिख रही तस्वीरें भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक की हैं, पहले और बाद की सैटेलाइट इमेज में साफ दिखता है कि कई हाई-वैल्यू टारगेट्स (उच्च मूल्य वाले लक्ष्य) पूरी तरह नष्ट कर दिए गए। उन्होंने आगे बताया कि बहावलपुर में भी एयर स्ट्राइक की गई।
#WATCH | Delhi | Director General Military Operations Lt Gen Rajiv Ghai says, "If we come down to Muridke. This is the terror hub of the Lashkar-e-Taiba. That's the Indian Air Force strike you can see on the screen right on top. The before and after pictures, some high-value… pic.twitter.com/W0H1peEvd8
— ANI (@ANI) October 14, 2025
मैक्सर सैटेलाइट की पहले और बाद की तस्वीरों में साफ दिखता है कि रॉकेट और मिसाइलें अपने लक्ष्यों को भेद चुकी हैं। उन्होंने कहा, इन इलाकों में आतंकवाद और पाकिस्तानी सेना के बीच खुलेआम गठजोड़ दिखा। यह इतना स्पष्ट था कि हमें भी हैरानी हुई कि उन्होंने किसी तरह की सावधानी नहीं बरती, तस्वीरों में साफ दिखता है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी एक प्रार्थना सभा की अगुवाई कर रहा था और उस कार्यक्रम में पाकिस्तान सेना के वरिष्ठ अधिकारी, यहां तक कि 4 कॉप्र्स के जनरल ऑफिसर कमांडिंग भी मौजूद थे। डीजीएमओ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की समस्या 1980 के दशक के अंत में शुरू हुई थी। तबसे अब तक 28 हजार से ज्यादा आतंकी घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि 1990 के दशक से अब तक अल्पसंख्यक समुदाय के एक लाख से अधिक लोगों को घाटी छोडऩे के लिए मजबूर होना पड़ा, जिनमें करीब 60 हजार परिवार शामिल हैं। इस पूरे दौर में 15,000 से अधिक निर्दोष नागरिकों और 3,000 से ज्यादा सुरक्षा बलों के जवानों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा, 2016 में हमारे सैनिकों पर बर्बर हमला हुआ, उनके टेंट जलाए गए, तब हमने एलओसी के नजदीक जवाबी कार्रवाई की। 2019 में हमने नियंत्रण रेखा पार कर सटीक हवाई हमला किया, लेकिन उसे सीमित रखा गया, मगर इस बार घटनाओं की तीव्रता और व्यापकता इतनी अधिक थी कि निर्णायक कदम उठाना आवश्यक हो गया। ऑपरेशन सिंदूर किसी एक घटना की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि वर्षों से जारी आतंकवाद के खिलाफ एक सोची समझी रणनीतिक कार्रवाई थी।
