मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा, मत्स्यपालक कल्याण कोष, निषाद राज बोट योजना की डीएम ने ली बैठक

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा, मत्स्यपालक कल्याण कोष, निषाद राज बोट योजना के अंतर्गत जिला स्तरीय समिति की बैठक सम्पन्न हुई।
उत्तर प्रदेश में ग्राम सभा के तालाबों में मत्स्य पालन का कार्य स्थानीय मछुआरों व पटटाधारकों द्वारा परंपरागत तरीके से किया जा रहा है। इन तालाबों की वार्षिक उत्पादकता 25 से 30 कुंतल प्रति हेक्टेयर है, इन तालाबों का मनरेगा कन्वर्जेंस के माध्यम से सुधार कराकर सुधारे गए ग्राम सभा एवं पट्टे के तालाबों में मत्स्य पालन हेतु अनुदान उपलब्ध कराते हुए मत्स्य उत्पादकता को 50 कुंतल प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। जिससे पटटाधारकों की आय में वृद्धि व उनका आर्थिक व सामाजिक उत्थान किया जाना संभव हो सकेगा। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना में ग्राम सभा पर आवंटित पट्टे के तालाबों पर कोई परियोजना अनुमान्य नहीं है। इसी रिकतता को भरने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री मत्स्य योजना लागू की गई है, जिस हेतु 24 जुलाई से 14 अगस्त तक पोर्टल पर आवेदन लिए गए इस परियोजना के अंतर्गत मनरेगा कन्वर्जेंस अथवां पट्टा धारक द्वारा स्वयं अथवा अन्य विभाग के माध्यम से सुधारे गए ग्राम सभा व अन्य पट्टे के तालाबों में मत्स्य पालन हेतु प्रथम वर्ष निवेश तथा तालाबों में मत्स्य बीज बैंक की स्थापना हेतु परियोजना लागत 4 लाख प्रति हेक्टेयर पर 40 प्रतिशत का अनुदान दोनों परियोजना पर सभी श्रेणी के लाभार्थियों को अनुमन्य कराया जाएगा। इस योजना के अंतर्गत अधिकतम 2 हेक्टेयर तक की सीमा तक योजना के पात्र होंगे। मत्स्य पालक कल्याण कोष का उद्देश्य मत्स्य पालको के कल्याण एवं विकास संबंधित कार्यक्रमों के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है। उत्तर प्रदेश मत्स्य पालक कल्याण कोष के संचालन के संबंध में इच्छुक मत्स्य पालक या मछुआरा या मछुआरा समुदाय से संबंधित ऐसा व्यक्ति अथवा कोई अन्य व्यक्ति जो 1 वर्ष अथवा उससे अधिक अवधि से मत्स्य पालन या मत्स्य की क्रिया कलापों से सक्रिय रूप से जुड़ा हो तथा उससे अपना जीविकोपार्जन करता हो, प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम संपादित कराने एवं मत्स्य विक्री हेतु मोपेड विद आइस बॉक्स की व्यवस्था की गई है। जिसकी इकाई लागत 60 लाख है जिसका 40 प्रतिशत अनुदान देय होगा तथा अवशेष धनराशि की व्यवस्था लाभार्थी द्वारा स्वयं के संसाधनों द्वारा करना होगा। उत्तर प्रदेश में मत्स्य पालन एवं मत्स्य आखेट पर निर्भर मत्स्यपालको व मछुआरों का जल स्रोतों में शिकार माही तथा मत्स्य प्रबंधन हेतु आर्थिक रूप से मजबूत व स्वावलंबी बनाए जाने के उद्देश्य से निषाद राज सब्सिडी योजना प्रदेश सरकार द्वारा 31 मार्च 2023 से लागू की गई है मत्स्य पालन, मत्स्य आखेट, नौकायन व पर्यटन स्थलों में नाव की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, इस योजना से गरीब मछुआरों को अनुदानित बोट मिलने से उनको अपनी आजीविका चलाने में सहायता प्राप्त होगी। इस योजना की इकाई लागत .67 लाख है। जिसके अंतर्गत लाभार्थी को वुडन फिशिंग बोट रुपए .50 लाख का एवं लाइफ जैकेटए जालए आइस बॉक्स रुपए ण्17 लाख कुल रुपए 0.67 लाख का क्रय करना होगा। इकाई लागत का 40 प्रतिशत अनुदान देय होगा व शेष धनराशि की व्यवस्था लाभार्थी द्वारा स्वयं के संसाधनों से करना होगा। लाभार्थी चयन में राजस्व संहिता 2016 में लिखित केवट, मल्लाह, निषाद, बिंद, धीमर, कश्यप, बाथम, रैकवार, माझी, गोडिया, कहांर, तुरैहा, तुराहा समुदाय से संबंधित .4 हे0 या उससे अधिक क्षेत्रफल के निजी व पट्टे के तालाबों के स्वामित्व धाराक व मत्स्य आखेट के साथ नौकायन में लगे हुए मछुआ समुदाय के व्यक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी। बैठक में सीडीओ व संबंधित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *