मेला श्रीरामनगरिया के कवि सम्मेलन में राष्ट्रीय चेतना व अध्यात्मक के गूंजे स्वर

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। मेला श्रीरामनगरिया के सांस्कृतिक पांडाल में स्थानीय काव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कवियों ने राष्ट्रीय चेतना व अध्यात्म की पंक्तियां पढ़ीं।
गुरुवार देर रात को मेला श्रीरामनगरिया के सांस्कृतिक पांडाल में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ अध्यक्ष कवि सत्यपाल सिंह प्रगल्भ, संयोजक महेश पाल सिंह उपकारी, वरिष्ठ कवियित्री भारती मिश्रा, संचालक वैभव सोमवंशी आदि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। अध्यक्षता कर रहे सत्यपाल सिंह प्रगल्भ ने कहा कि देश के बलिदानियों से ही हमें आजादी मिली है। सरहद पर सेना के जवानों के कारण ही हम चैन की नींद सो पाते हैं। उन्होंने श्विज्ञान की है दुनिया विद्वान बनके देख, नुकसान करने वालो किसान बनके, देख गुरूता से मान मिलता मिलती सराहना, हैवान कितने देखे इंसान बनके देख पंक्तियां पढ़ीं। संयोजक महेश पाल सिंह उपकारी ने कहा लगा दे तन मन में आग उसे उद्घोष कहते है, रहे चुप कसम खाकर जो उसे खामोश कहते है, उठे तूफान में भी जो चले विपरीत धारा के, उसे जय हिन्द जिंदादिल एस0सी बोस कहते है। वरिष्ठ कवियित्री भारती मिश्रा ने हम प्रेम की रस्म कुछ इस तरह निभाते हैं वह अपना, न अपना, हम अपनाते हैं रचना पढ़ी। हास्य कवि राम मोहन शुक्ल ने कहा छेडऩे पर हुस्न को हमें गाली मिली मौका था, जब छेडऩे का तो न साली मिली। अनुजा सोमवंशी, कवि उत्कर्ष अग्निहोत्री, कवित्री प्रीति तिवारी, दिलीप कश्यप, युवा गीतकार विशाल श्रीवास्तव, कवि प्रियांशु पाण्डेय, निमिष टंडन, दिनेश अवस्थी ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम में सभी कवियों का शाल उड़ाकर सम्मानित किया गया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। संचालन वैभव सोमवंशी ने किया। इस मौके अनुराग सोमवंशी, विभोर सोमवंशी, दीपक मिश्रा, सुब्रत, सुयश, रजनी सोमवंशी, जगतपाल सिंह, रुकमंगल सिंह, सत्यपाल, विनोद दुबे, आरती दुबे उपस्थित रहे।

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