पुत्र की हत्या का मुकदमा दर्ज करवाने के लिए भटक रहा पिता

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। पुत्र की हत्या का मुकदमा दर्ज करवाने के लिए पीडि़त ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगायी है।
पीडि़त ने जिलाधिकारी को दिये गये प्रार्थना पत्र में कहा है कि पीडि़त रकाबगंज खुर्द टाउनहाल थाना मऊदरवाजा का निवासी है। पीडि़त दलित व्यक्ति है। पीडि़त का पुत्र पिंकू राकेश भारद्वाज की परचून दुकान पर काम करता था। दिनांक ५ सितंबर को पीडि़त के पुत्र पिंकू पुत्र सूरजपाल समय करीब ६ बजे राकेश भारद्वाज का पुत्र निवासी रकाबगंज करबला रोड थाना मऊदरवाजा को घर से जबरदस्ती परचून की दुकान पर काम पर ले गया। रविवार का दिन होने के कारण पिंकू दुकान पर नहीं जाना चाहता था। परन्तु जबरिया पिंकू को राकेश भारद्वाज का पुत्र जबरदस्ती ले गया। माता के मना करने पर नहीं माना। करीब शाम ७ बजे पिंकू के पिता सूरजपाल अपने पुत्र को लेने राकेश भारद्वाज की दुकान पर पहुंचे, तो उन्होंने कहा कि मैं १५ मिनट बाद पिंकू को घर भेज दूंगा। ठीक १५ मिनट बाद फोन आता है कि पिंकू घर पहुंच गया है, लेकिन पिंकू घर नहीं पहुंचा। उसके बाद सूरजपाल दोबारा जाते है, लेकिन पिंकू परचून की दुकान पर नहीं मिलता है। जिस पर उसका पूरा परिवार पिंकू की खोजबीन में लग जाता है। दिनांक ६ सितंबर को रात्रि १.३० बजे पीडि़त थाना मऊदरवाजा पहुंचता है। दुकान बंद होने के कारण लिखित प्रार्थना पत्र नहीं दे पाता है और वर्तमान पुलिस कर्मचारी को पुत्र के लापता होने की पूरी घटन बताकर मोबाइल में बयान रिकार्ड करवा देता है। सुबह १० बजे अन्य लोगों के द्वारा सूचना मिलती है कि काशीराम कालोनी हैवतपुर गढिय़ा तिराहा पुलिस के पास कोई लाश पड़ी है। परिवारीजनों के किसी एक व्यक्ति ने शिनाख्त करने पर मृतक लाश सूरजपाल के पुत्र पिंकू की थी। सूरजपाल ने आरोप लगाया कि उपरोक्त राकेश भारद्वाज, पुत्र स्व0 दयाराम, सोमनाथ भारद्वाज पुत्र राकेश भारद्वाज व नीरज भारद्वाज पुत्र राकेश भारद्वाज, नीलकंठ भारद्वाज पुत्र राकेश भारद्वाज निवासीगण रकाबगंज खुर्द थाना मऊदरवाजा ने मेरे पुत्र को मारकर नाले में डाल दिया है। पुलिस ने राकेश भारद्वाज व उनके तीनों पुत्रों को हिरासत में ले लिया है। परिवार द्वारा दोषियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराने के लिए एस0ओ0 मऊदरवाजा से कहा गया, लेकिन उन्होंने मुकदमा पंजीकृत नहीं किया और कहा कि उच्चाधिकारियों को प्रार्थना पत्र दो।

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