समृद्धि न्यूज। वित्त मंत्री ने निर्यातकों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी चिंताओं से अवगत है और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठा रही है। उन्होंने निर्यातकों से रोजगार में कटौती न करने का आग्रह किया है और जल्द ही समाधान निकालने का वादा किया है। अमेरिकी टैरिफ के कारण उपजी चिंताओं के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि निर्यात संवर्धन मिशन शुरू करने पर तेजी से काम हो रहा है। सरकार ने कहा है कि निर्यातकों के साथ वे मजबूती से खड़ी हैं। हितों की हिफाजत होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को निर्यातकों से कहा कि सरकार उनकी चिंता से वाकिफ है और निर्यात हित के लिए कई मोर्चे पर कदम उठाने की तैयारी चल रही है। सरकार निर्यात को बचाने के लिए प्रतिबद्ध है और जल्द ही उपायों की घोषणा की जाएगी। 27 अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर अमेरिका की तरफ से 50 प्रतिशत शुल्क लगाने के बाद निर्यातक अमेरिकी बाजार में निर्यात में भारी गिरावट को लेकर आशंकित है जिससे उन्हें उत्पादन से लेकर रोजगार तक में कटौती करनी पड़ सकती है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के अध्यक्ष एस0सी0 रल्हन ने बताया कि बातचीत के दौरान वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि निर्यात में कटौती की वजह से वे रोजगार पर इसका असर नहीं पडऩे दे। सरकार इस दिशा में जल्द ही कोई स्कीम लेकर आ सकती है। माना जा रहा है कि अमेरिका में जिन वस्तुओं के निर्यात के अधिक प्रभावित होने की आशंका है, उनके लिए अलग से वित्तीय पैकेज की घोषणा की जा सकती है। सरकार टैरिफ प्रभावित क्षेत्रों में एमएसएमई निर्यातकों के लिए आपातकालीन के्रडिट लाइन गारंटी योजना, निर्यात ऋणों पर स्थगन ताकि परिसंपत्ति डाउनग्रेड किए बिना परिचालन की सहूलियत मिल सके और लंबे भुगतान चक्रों के कारण नकदी प्रवाह की चुनौतियां कम करने के लिए निर्यात प्राप्ति अवधि के विस्तार पर भी विचार कर रही है। सरकार बजट में घोषित निर्यात संवर्धन मिशन के तहत छह वित्त वर्षों (2025 से 2031) के लिए करीब 25,000 करोड़ रुपये के सहायता उपायों पर गौर कर रही है। दो उपयोजनाओं निर्यात प्रोत्साहन (10]000 करोड़ से अधिक) और निर्यात दिशा (14,500 करोड़ से अधिक) के माध्यम से इसके क्रियान्वयन का प्रस्ताव है। सरकार जल्द ही एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत वित्तीय इंसेंटिव का ऐलान करने जा रही है। एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत निर्यातकों को चीन, वियतनाम, जैसे देशों की तरह सस्ती दरों पर कर्ज दिए जाएंगे। अमेरिकी खरीदार की तरफ से पुराने माल की डिलिवरी को होल्ड पर करने और नए आर्डर नहीं देने से कई निर्यातकों के सामने नकदी की समस्या हो गई है। सरकार निर्यातकों के इस समस्या को भी दूर करने जा रही है। दूसरी तरफ, वित्त मंत्रालय ने काटन के आयात को अब दिसंबर तक शुल्क मुक्त कर दिया है। कुछ दिन पहले काटन के आयात को सितंबर तक शुल्क मुक्त करने की घोषणा की गई थी। काटन के आयात पर 11 प्रतिशत का शुल्क लगता था और अब दिसंबर तक इसके आयात पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। अमेरिकी दबाव दरकिनार कर भारत ने सितंबर में रूस से कच्चे तेल का आयात 10-20 फीसदी तक बढ़ाने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार, यह बढ़ोतरी प्रतिदिन 1,50,000 से 3,00,000 बैरल तक हो सकती है। सरकार का कहना है, यह निर्णय भारत की ऊर्जा सुरक्षा व आर्थिक हितों के मद्देनजर है।
