बाढ़ का पानी पैलानी दक्षिण गांव में घुसा, ग्रामीणों बोल मर जाएंगे लेकिन घर छोड़कर नहीं जाएंगे

शमसाबाद, समृद्धि न्यूज। अब गंगा नदी के पानी का रुख गंगा कटरी में बसे गांव पैलानी दक्षिण की तरफ हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मर जायेंगे, लेकिन घर छोड़कर नहीं जायेंगे। उनका कहना कि बड़ी मुश्किल से एक-एक पैसा जोड़कर अशियाना बनाया। अब उसे छोड़कर कहां जायें। जानकारी के अनुसार ढाईघाट शमशाबाद की गंगा कटरी में बसे गांव पैलानी दक्षिण के मजरा बांसखेड़ा को बाढ़ के पानी ने अपनी चपेट में ले लिया है। परिणामस्वरुप बाढ़ का पानी पूरे गांव में भर गया। सबसे बड़ी बात यह है इस गांव की आबादी लगभग चार सौ पचास के आसपास है। लगभग 2 सैकड़ा आशियाने हैं। बाढ़ का पानी इस कदर दाखिल हुआ लोगों के आने-जाने के रास्ते बंद हो गए। इतना सब कुछ होने के बावजूद भी बाढ़ का सैलाब लगातार गांव की ओर बढ़ता ही जा रहा है। आसपास जलभराव होने के साथ-साथ गांव की गलियों से जल सैलाब दाखिल होकर ग्रामीणों के घरों में भरने लगा है। ग्राम प्रधान जुबेर खान ने बताया लगातार हो रहे जलभराव को लेकर ग्रामीणों को आगाह कर दिया गया। उन्हें सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए भी कह दिया गया, लेकिन ग्रामीणों का कहना है मर जाएंगे लेकिन घर छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कुछ लोगों ने अपने घरों के आसपास मिट्टी की बाढ़ बना ली। जिससे घरों में पानी जाने से रोका जा सके। बताते हैं ग्रामीण नजम, इसरार, राकेश, बशीर, छोटे, सुकले, इस्पाक तथा यासीन सहित कई लोगों के मकानों में पानी भर गया है। इसके बावजूद भी ग्रामीण गांव छोडऩे को तैयार नहीं हैं। ग्राम प्रधान ने बताया ग्रामीणों के फरमान को प्रशासनिक अधिकारियों से अवगत करा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है गाढ़ी कमाई के जरिए घर मकान आशियाने तैयार किए। यहां तक की घर गृहस्थी सारी व्यवस्थाएं घरों पर ही, ऐसे हालातों में घर बार छोड़कर जाना कहा तक होगा। लोगों को डर है उनके जाने के बाद घर मकान अराजक तत्वो के शिकार ना हो जाए। बाढ़ पीडि़त लोगों का कहना था घर गृहस्थी का सामान जिसे बड़ी मेहनत से तैयार किया, हजारों, लाखों रुपए खर्च किए भला ऐसे कैसे छोड़कर जाया जाए। ग्राम प्रधान जुबेर खान ने बताया बाढ़ के चलते चारों तरफ जल सैलाब देखा जा रहा है। घर मकान खेत खलिहान सब कुछ डूबे हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि पशुओं के लिए चारे पानी की व्यवस्थाएं ध्वस्त हो गईं। चारे के लिए किसानों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पशुपालक नाव अथवा बैल गाडिय़ों के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले समय में हालात और भी भयावह होंगे। यह सोचकर ग्रामीणों की दिन का चैन व रातों की नींद उड़ गयी है।

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