हाईकोर्ट ने कायमगंज की पूर्व चेयरमैन से वसूली का आदेश किया रद्द

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नगर पालिका परिषद कायमगंज की पूर्व चेयरमैन रीता गंगवार के खिलाफ जारी 18 लाख 26 हजार 159 रुपये की वसूली का आदेश और उससे संबंधित रिकवरी सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया है।
न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने जिला मजिस्ट्रेट और अधिशासी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों द्वारा की गई कार्यवाही उनके अधिकार सीमा से परे है, इसे जारी नहीं रखा जा सकता है।
विगत वर्ष 2017-18 में 14वें वित्त आयोग से प्राप्त सार्वजनिक धन के कथित गबन से जुड़ा है। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन अधिशासी अधिकारी प्रमोद कुमार श्रीवास्तव और लेखाकार राम सिंह को दोषी पाया गया था। जिला मजिस्ट्रेट की संस्तुति पर राज्य सरकार ने 5 जनवरी 2021 को केवल इन दोनों से 1.35 करोड़ की वसूली का आदेश दिया था। जांच पूरी होने के बाद वर्तमान अधिशासी अधिकारी ने बिना किसी नए निर्देश या साक्ष्य के पूर्व चेयरमैन रीता गंगवार को नोटिस जारी कर दिया और उन्हें भी गबन का जिम्मेदार ठहराते हुए वसूली की सिफारिश कर दी। जिला मजिस्ट्रेट ने इस सिफारिश को स्वीकार करते हुए 19 अगस्त 2021 को वसूली आदेश जारी कर दिया। जिसके आधार पर तहसीलदार ने रिकवरी सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया। जिसके बाद पूर्व चेयरमैन रीता गंगवार कह ओर से हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि एक बार जांच पूरी हो गई, दोषियों के खिलाफ वसूली आदेश भी जारी हो गया, इसके बाद याची के खिलाफ वसूली की नोटिस जारी की गई। याची का पक्ष भी नहीं सुना गया। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि जब राज्य सरकार और जिला मजिस्ट्रेट की पूर्व जांच में चेयरमैन को दोषमुक्त पाया गया था, तब अधिशासी अधिकारी को जांच दोबारा खोलने या निष्कर्ष बदलने का अधिकार नहीं था। न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने जिला मजिस्ट्रेट और अधिशासी अधिकारी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अधिकारियों द्वारा की गई कार्यवाही उनके अधिकार सीमा से परे है, इसे जारी नहीं रखा जा सकता है और कोर्ट ने वसूली आदेश और रिकवरी सर्टिफिकेट को रद्द कर दिया।

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