वन विभाग के दो सैकड़ा से अधिक पेड़ों को लाखों रूपये में बेंचने का मामला
शमशाबाद, समृद्धि न्यूज। थाना क्षेत्र के गदनपुर चैन में निकली वन विभाग की जमीन पर खड़े दो सैकड़ा से अधिक पेड़ों को सत्ता के मद में चूर वन दरोगा समीर सेंगर ने षडयंत्र के चलते पहले पेड़ों को जेसीबी से उखड़वा दिया और बाद में दो सैकड़ा से अधिक पेड़ों को लाखों रूपये में क्षेत्र के ही अपने चहेते एक लकड़ी माफिया को लाखों रूपये की मोटी रकम लेकर बेंच दिया। सबसे मजेदार बात तो यह है कि जब वन विभाग द्वारा नर्सरी ही संचालित होनी थी तो वहां खड़े लगभग दो सैकड़ा से अधिक विशाल भारी भरकम वृक्षों को लकड़ी माफिया को लाखों रूपये में बेंचकर कटवाने की जरूरत क्या थी। अगर दो सैकड़ा पेड़ लकड़ी माफिया को बेचने ही थे तो इन वृक्षों की नीलामी क्यों नहीं की गई। वन दरोगा द्वारा सरकारी राजस्व को लाखों का चूना क्यों लगा दिया गया, क्योंकि वन दरोगा समीर सिंह सेंगर एक जन प्रतिनिधि का करीबी बताया जाता है और सत्ता के मद में कुछ भी जायज हैष यह बात वन दरोगा समीर सिंह सेंगर पर एकदम सटीक बैठती है। वन दरोगा समीर सिंह सेंगर का इतना खौफ है कि रेंजर राजेश कुमार तक की हिम्मत नहीं है कि वह वन दरोगा समीर सिंह सेंगर द्वारा किए गए सरकारी धन के गोलमाल के संबंध में कुछ कह सकें। जांच पड़ताल की गई तो पता चला कि दो सैकड़ा से अधिक पेड़ों का सौदा वन दरोगा समीर सिंह सेंगर ने लाखों रूपये में बिना किसी उच्चाधिकारी को सूचित किए हुऐ ही क्षेत्र के ही अपने चहेते एक लकड़ी माफिया के साथ किया। मजेदार बात तो यह है कि जब मौके पर जाकर जानकारी की गई तो ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव में लगभग 5 एकड़ के करीब जमीन पर भारी भरकम पेड़ों का एक वन था जिसमें करीब दो सैकड़ा से अधिक पेड़ खड़े हुए थे। कुछ दिनों पहले वन्य विभाग की टीम के द्वारा बताया गया कि यह जमीन वन्य विभाग की है। वन दरोगा समीर सिंह सेंगर ने एक षडयंत्र के तहत वन्य विभाग की जमीन पर खड़े पेड़ों को पहले जेसीबी से उखड़वा दिया और उन्हें लाखों रुपये में बेचच दि9या। वहीं जब इस संबंध में कायमगंज क्षेत्र के क्षेत्रीय वन्य अधिकारी रेंजर राजेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया शमशाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम गदनपुर चैन में कुछ जमीन बन विभाग की पाई गई थी। जिस पर साफ -सफाई का काम कराया जा रहा है। लकड़ी किसको बेची गई है इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। सूत्रों के अनुसार उक्त जमीन पर वन संपदा थी। जिस पर खड़े वृक्षों को शमशाबाद के ही एक लकड़ी माफिया के हाथों विक्रय कर दिया गया है। हालांकि इस प्रकरण में रेंजर ने जानकारी देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया है।
वन दरोगा के आगे उच्चाधिकारियों ने टेंके घुटने, नहीं कर पा रहे कार्यवाही
