दहेज हत्या में पति को सात वर्ष का कारावास

सास व ससुरा दोषमुक्त

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। दहेज हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेन्द्र सिंह ने साक्ष्य के आधार पर आरोपी पति मंदीप को सात वर्ष कारावास व 30 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया। विगत छह वर्ष पूर्व पीडि़त जागेश्वर दयाल पुत्र नत्थू लाल धोबी मोहल्ला पछुआ कस्बा अल्लाहगंज जिला शाहजहांपुर ने दर्ज कराये मुकदमे में दर्शाया था कि मैने 25 नवंबर 2016 को अपनी 27 वर्षीय पुत्री बंदना उर्फ बंटी उर्फ पूनम का विवाह मंदीप उर्फ अवनीश पुत्र रामरतन धोबी निवासी चंदुया थाना मेरापुर के साथ किया था। अपने सामर्थ अनुसार दान दहेज दिया था। मेरे द्वारा दिए गए दान दहेज से पति मंदीप उर्फ अवनीश, ससुर रामरतन, हंसा देवी, जेठ उमेश उर्फ सुमंत कुमार, ऋषि कुमार उर्फ गोविंद उर्फ दिनेश, जेठानी पुष्पा देवी पत्नी उमेश चंद, ननदन गिरिजा देवी, नंदोई धीरपाल निवासी धोबीपाई थाना गंजडुंडवारा जिला काशीराम नगर कासगंज अतिरिक्त दहेज में अल्टो कार व 4 लाख रुपये की मांग करने लगे। इस दौरान मेरी पुत्री का उत्पीडऩ शुरू कर दिया। 5 जून 2017 को मेरी पुत्री की हत्या कर दी। पुलिस ने पति मनदीप उर्फ अवनीश, ससुर राम रतन, सास हंसा देवी उर्फ गंगा देवी के विरुद्ध न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की। अभियुक्त रामरतन तथा हंसा देवी को धारा 498ए, 304बी व 3/4 डीपी एक्ट तथा विकल्प की धारा 302,34 आईपीसी में दोषमुक्त कर दिया। अभियुक्त पति मनदीप उर्फ अवनीश को धारा 306 आईपीसी के तहत दोषी करार देते हुए 7 वर्ष का कारावास व 30 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने पर 1 वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। जुर्माने की आधी धनराशि वादी को बतौर क्षतिपूर्ति के रूप में दी जाए। अभियुक्त द्वारा जेल में बितायी गई अवधि को सजा में समायोजित की जाये।

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