समृद्धि न्यूज़ अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रेषित प्लान आफ एक्शन 2023-24 के अनुपालन में जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष राम सुलीन सिंह के निर्देशानुसार बुधवार को लालता प्रसाद इंटर कॉलेज उर्मिला नगर मुबारकपुर टांडा में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ विषय पर विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में अपर जिला जज व प्राधिकरण सचिव कमलेश कुमार मौर्य,असिस्टेंट लीगल एड डिफेंस काउंसिल शरद कुमार पांडेय, प्रबंधक एच.सी.मिश्रा, प्रधानाचार्या श्रीमती नीलम पांडेय,दधिचि देहदान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के.पी.सिंह पालीवाल,कॉलेज की छात्राएं, शिक्षिकायें व अभिभावक उपस्थित रहे।शिविर को संबोधित करते हुए प्राधिकरण सचिव श्री मौर्य ने बताया कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय तथा मानव संसाधन विकास की एक संयुक्त पहल के रूप में समन्वित और अभिसारित प्रयासों के अंतर्गत बालिकाओं को संरक्षण देने और सशक्त करने के लिए इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा 22 जनवरी 2015 को हरियाणा राज्य के पानीपत जिले में की गई जिसे निम्न लिंगानुपात वाले सौ जिलों में प्रारंभ किया गया है।इस योजना के अंतर्गत पक्षपाती लिंग चुनाव की प्रक्रिया का उन्मूलन, बालिकाओं का अस्तित्व और सुरक्षा सुनिश्चित करना, बालिकाओं की शिक्षा सुनिश्चित करना,उन्हें शोषण से बचाना तथा सही व गलत के बारे में अवगत कराना,बालिकाओं को शिक्षा के माध्यम से लड़कियों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना है।लोगों को इसके प्रति जागरूक करना तथा बेटियों के अस्तित्व को बचाना और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक सामाजिक आंदोलन और सामान्य मूल्य को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान का कार्यान्वन करना निम्न लिंगानुपात वाले जिलों की पहचान कर ध्यान देते हुए गहन और एकीकृत कार्रवाई करना है।लीगल एड डिफेंस काउंसिल के असिस्टेंट श्री पांडेय ने उपस्थित लोगों को बाल अधिकार व महिला अधिकार के विषय में जानकारी प्रदान करते हुए उन्हें विधिक जानकारी प्रदान की तथा बताया कि शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाने संबंधी कानून के लागू होने से बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का सपना साकार हुआ है। इसे बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 का नाम दिया गया है।शिक्षा का अधिकार अधिनियम जिसमें संविधान के 86वें संशोधन अधिनियम 2002 के द्वारा 21 (क) जोड़कर शिक्षा को मौलिक अधिकार बना दिया गया है।शिक्षा का अधिकार विधेयक को संसद में 04 अगस्त 2009 को मंजूरी प्रदान की गई तथा एक अप्रैल 2010 से शिक्षा का अधिकार कानून लागू हुआ। इस कानून के अंतर्गत बच्चों को अनिवार्य निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के लिए अनेक प्रावधान किए गए हैं।बेहतर शिक्षा सभी के लिए जीवन में आगे बढ़ाने और सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत आवश्यक है।यह हमारे अंदर आत्मविश्वास विकसित करने के साथ ही हमारे व्यक्तित्व निर्माण में भी सहायता करती है। स्कूली शिक्षा सभी के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दधिचि देहदान संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पालीवाल द्वारा शिविर में उपस्थित सभी लोगों को देहदान के महत्व के विषय में जानकारी दी गई तथा देहदान के लिए प्रेरित किया गया। प्रधानाचार्या श्रीमती पांडेय द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित आगंतुकों तथा लोगों का आभार ज्ञापन किया गया।

