फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश एस0सी0/एस0टी0 एक्ट द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेन्द्र सिंह ने अभियुक्त मनोज, छत्रपाल, निर्मला, अवधेश को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है।१९९७ को थाना कम्पिल के सुल्तानपुर राजकुमार निवासी पीडि़त ने पुलिस को दी तहरीर में दर्शाया था कि मेरे गांव का कैलाश उर्फ रामेश्वर पुत्र रामचन्द्र जो तीन वर्ष से लापता चला रहा था, जो मेरा फुफेरा भाई है। उसके गायब होने के बाद उसकी पत्नी निर्मला ने गांव के राजेन्द्र पुत्र मोकम से शादी कर ली। यह बात मेरे फूफा रामचन्द्र व हम लोगों को अच्छी नहीं लगी। फूफा रामचन्द्र चाहते थे कि पुत्र के लडक़ा-लडक़ी मुझे मिल जाये। इसी को लेकर वह अक्सर गांव आते थे और मेरे घर पर ही रुकते थे, लेकिन निर्मला व राजेन्द्र बच्चे देना नहीं चाहते थे। फूफा को मेरे घर पर रुकने से यह लोग नाराज रहते थे। फूला रामचन्द्र ने इन लोगों पर दबाव बनाने के लिए पुत्र की हत्या कर गायब करने का आरोप लगाकर मुकदमा दर्ज कराने की कोशिश की थी। इसी मामले में मेरे भाई ऋषीराम ने फूफा की काफी मदद की थी। जिससे यह लोग मेरे भाई ऋषीराम से नाराज रहते थे। उसी शाम को मेरा भाई मौसा द्वारिका प्रसाद के यहां गया था। मौसा का लडक़ा मेरे घर आया और बताया कि राजेन्द्र पुत्र मोकम, मनोज पुत्र वेदराम, छत्रपाल पुत्र रामसेवक निवासीगण सुल्तानपुर राजकुमार व अवधेश पुत्र रामेश्वर भुर्जी निवासी बैरमपुर शमशाबाद हाल पता सुल्तानपुर राजकुमार पंचायत कराने के लिए ऋषीराम को बम्बा की तरफ ले गये है। रात होने की बजह से मैं व गांव सोवर व मानसिंह व यादराम के साथ भाई को ढूंढने गये तो टार्च की रोशनी में मेरा भाई ऋषीराम व निर्मला दिखायी पड़ी। हम लोगों ने रुकने को कहा तो निर्मला ने ललकारा कि पीछे कुछ लोग आ रहे है जल्द ऋषीराम को खत्म कर दो। इतने में राजेन्द्र ने देशी बंदूक व मनोज व अवधेश ने तमंचों से तथा छत्रपाल ने चाकू से मारकर हत्या कर दी। आरोपीगण घटना को अंजाम देकर गांव की तरफ भाग गये। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल की। बचाव पक्ष व शासकीय अधिवक्ता की कुशल पैरवी के आधार पर विशेष न्यायाधीश एस0सी0/एस0टी0 एक्ट द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेन्द्र सिंह ने अभियुक्त मनोज, छत्रपाल, निर्मला, अवधेश को दोषी करार देते हुए धारा १४७ में एक वर्ष के कारावास व ५ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा १४७ में एक वर्ष के कारावास व ५ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा ३०२/१४९ के अपराध में आजीवन कारावास व १५ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा से दंडित किया। धारा २५ में एक वर्ष के कारावास व ५ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा २५/४ में एक वर्ष के कारावास व ५ हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदा न करने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियुक्तों द्वारा जेल में बितायी गई अवधि को सजा में समायोजित की जायेगी।
हत्या के मामले में चार को आजीवन कारावास
