हत्या व पास्को एक्ट के मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। हत्या व पास्को एक्ट के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पास्को एक्ट) मेराज अहमद ने अभियुक्त सचिन पुत्र खुशीराम निवासी भिम्मी नगला थाना कमालगंज को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास व अर्थदंड की सजा से दंडित किया।
थाना कमालगंज के भिम्मी नगला निवासी पीडि़त पिता ने दर्ज कराये मुकदमे में दर्शाया था कि 10 दिसम्बर 2021 मेरी 14 वर्षीय पुत्री जो इंटरमीडिएट आरपी इंटर कालेज की छात्रा है पढऩे के लिए अपनी सहेली के साथ गयी थी। जब वह दोपहर तक नहीं पहुंची तो मैंने उसकी सहेली से पूछा जिस पर उसने कहा कि मैं चाचा को बता दूंगी, लेकिन घर वालों के उत्पीडऩ की बजह से अब कोई बात बताने से मना करती है। दोनों लड़कियों ने 21  दिसम्बर 2021 को हॉफ-डे की छुट्टी ली थी। 25 दिसम्बर 2021 को पुलिस ने सचिन पुत्र खुशीराम के विरुद्ध धारा 363  के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया। विवेचक ने मुकदमे की जांच की। पुलिस को अपहृत छात्रा का शव बरामद हुआ। जिसके बाद पुलिस ने सचिन के विरुद्ध धारा 363, 366, 376, 302, 201 व धारा 3/4 पास्को एक्ट के तहत आरोपत्र पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। शासकीय अधिवक्ता की कुशल पैरवी के आधार पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (पास्को एक्ट) मेराज अहमद ने अभियुक्त सचिन पुत्र खुशीराम निवासी भिम्मी नगला थाना कमालगंज को दोषी करार देते हुए धारा 363 के आरोप में 3 वर्ष के साधारण कारावास व 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर 5 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 366 के आरोप में 5 वर्ष के साधारण कारावास व 500   रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर 5 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 4 की उपधारा (2) लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के दण्डनीय अपराध के आरोप में 20 वर्ष के साधारण कारावास व 2 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर 2 माह का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। धारा 302 के आरोप में आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर तीन माह के अतिरिक्त कारावास भोगना होगा। धारा 201 के आरोप में 3 वर्ष के साधारण कारावास व 500 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर 5 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। धारा 428 के तहत अभियुक्त द्वारा जेल में बितायी गई अवधि को सजा में समायोजित की जायेगी। आरोपी द्वारा अर्थदंड जमा करने पर 80 प्रतिशत धनराशि मृतका के माता-पिता को दी जायेगी।

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