हत्या व फिरौती के मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास

कुल जुर्माने के साढ़े 4 लाख रुपये का 50 प्रतिशत पीडि़त को दिया जायेगा साक्ष्य मिटाने के मामले में पत्नी व मां तीन-तीन वर्ष का कारावास व 50-50 हजार रुपये का अर्थदंड

फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। फिरौती न मिलने पर बालिका की हत्या कर देने के मामले में विशेष अपर जिला जज पाक्सो न्यायाधीश सुमित प्रेमी ने आरोपी चन्द्रशेखर श्रीवास्तव पुत्र सुरेशचन्द्र को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास (शेष प्रकृत जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास) व साढ़े तीन लाख रुपये का अर्थदण्ड से दण्डित किया। वहीं आरोपी की पत्नी गीता देवी व मां कुसुमलता को साक्ष्य मिटाने के मामले मे तीन-तीन वर्ष का कारवास व 50-50 हजार रुपये से दण्डित किया। विगत वर्ष 13 अक्टूबर 2020 को कोतवाली मोहम्मदाबाद क्षेत्र के खिमसेपुर निवासी समरपाल पुत्र मैकूलाल ने दी गयी तहरीर में दर्शाया था कि मेरी 10 वर्षीय पुत्री को 13 अक्टूबर 2020 को शाम 5 बजे से गुम हो गयी थी। काफी खोजबीन के बाद भी नहीं मिली। पुलिस ने धारा 363 के तहत मामला दर्ज कर लिया था। घटना के दो दिन बाद मेरे पुत्र रामू ने पुलिस को बताया कि मेरी बहन घर से गुम हो गई थी। जिसका मुकदमा दर्ज है, तब से हम काफी खोजबीन कर रहे। 14 अक्टूबर को मेरे चचेरे भाई सुरजीत के मोबाइल पर मेरी बहन के मोबाइल से फोन आया और 5 लाख रुपये फिरौती के रुप में मांग की और दो दिन का समय दिया, घटना पुलिस को बताई। जांच के दौरान पता चला कि पड़ोसी चन्द्रशेखर पुत्र सुरेशचन्द्र ने मेरी बहन का गैंसिगपुर गैस प्लांट के पास मोबाइल को खोला और उसमे 49 रुपये का रिचार्ज करवाया। उसके बाद फिरौती की मांग की। पुलिस ने किशोरी का शव व मोबाइल फोन चन्द्रशेखर के घर से बरामद किया। पुलिस ने हत्या व फिरौती मांगने व उसकी मां व पत्नी, पिता को साक्ष्य मिटाने के मामले में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। मुकदमा विचारण के दौरान सुरेशचन्द्र की मृत्यु हो गयी थी। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की दलील व शासकीय अधिवक्ता की कुशल पैरवी के आधार पर विशेष पाक्सो एक्ट न्यायाधीश सुमित प्रेमी ने अभियुक्त चन्द्रशेखर को दोषी करार देते हुए धारा 5/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम के अधीन वर्णित अपराध के अभियोग में आजीवर कारावास जिसका अभिप्राय अभियुक्त के शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए आजीवन कारावास होगा तथा 1लाख रुपये का जुर्माना से दंडित किया। अदा न करने पर एक वर्ष का कठोर कारावास भुगतना पड़ेगा। धारा 302 में आजीवन कारावास व 1 लाख रुपये का जुर्माना से दंडित किया। अदा न करने पर एक वर्ष का कठोर कारावास भुगतना पड़ेगा। धारा 364ए में आजीवन कारावास व 1 लाख रुपये का जुर्माना से दंडित किया। अदा न करने पर एक वर्ष का कठोर कारावास भुगतना पड़ेगा। अभियुक्त चन्द्रशेखर व गीता व कुसुमलता को धारा 201 में तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास व 50-50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अर्थदंड अदा न करने पर एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। अभियुक्तों द्वारा जेल में बितायी गई अवधि को सजा में समायोजित किया जायेगा।

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