गणेश चतुर्थी से अनन्त चतुर्थी तक गणपत्ति बप्पा मोरया के गूंजेंगे उद्घोष
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। भारतीय सनातन परम्परा के प्रथम पूज्य देव गणेश पूजा का प्रचलन महाराष्ट्र के बाद अब और आसपास के क्षेत्र में भी पूरी तरह से हो गया है। ऐसे में दूर-दूर से भगवान गजानन की मूर्तियां बेंचने वाले एक फिर शहर में डेरा डाल चुके है। गैर जनपदों, महाराष्ट्र व राजस्थान से आकर यहां मूर्तियां बनाते व बेंचते हैं। बनाने वाले इन लोगों ने फर्रुखाबाद-फतेहगढ़ मार्ग पर पडऩे वाले मिशन कम्पाउंड के निकट मूर्तियों का बाजार सजा रखा है। जहां १०० से लेकर १० हजार कीमत के भगवान गजानन मौजूद हंै, हालांकि अभी तक यह लोग खरीददारों का इंतजार करते ही देखे जा रहे है, लेकिन इन्हे उम्मीद है कि आने वाले समय में इनका प्रयास सार्थक होगा और सभी मूर्तियां अच्छे दामों में बिक जायेगी।
गणेश चतुर्थी उत्सव शुरू होने में अब बस कुछ ही दिन बाकी हैं। 10 दिन के इस उत्सव के लिए गणेश उत्सव २६ अगस्त से शुरू हो रहा है। साथ ही गणपति का आगमन बेहद शुभ योग में हो रहा है, यानी कि शुभ योग में गणपति घर-घर में विराजेंगे, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश स्थापना की जाती है। 10 दिन अपने भक्तों के साथ रहने के बाद गजानन वापस अपने लोक को चले जाते हैं और गणेश विसर्जन के साथ गणेशोत्सव पर्व संपन्न होता है। हिंदू धर्म में बुधवार का दिन गणपति को समर्पित है। इस साल गणेश चतुर्थी २६ अगस्त मंगलवार को है, यानी कि 10 दिवसीय गणेशोत्सव पर्व मंगलवार से शुरू होगा। मंगलवार के दिन अपने भक्तों के बीच गणेश जी का आगमन बेहद शुभ है, जो लोग पंडाल में या अपने घर में गणपति की स्थापना करना चाहते हैं। उन्हें गणेश जी की स्थापना शुभ मुहूर्त में करना चाहिए। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि २६ अगस्त की दोपहर से शुरू होगी और २७ अगस्त को दोपहर 03:४४ बजे समाप्त होगी। लिहाजा २७ अगस्त की दोपहर करीब साढ़े 3:४४ बजे तक गणेश जी की मूर्ति की स्थापना का शुभ समय रहेगा। २७ अगस्त को गणपति स्थापना के 10 दिन बाद ६ सितंबर को भगवान गणेश अपने धाम को लौट जाते हैं। इसी दिन लोग गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ के जयकारों के साथ गणेश विसर्जन करते हैं। इस दिन अनंत चतुदर्शी तिथि रहती है। इसके बाद 15 दिन के पितृ पक्ष शुरू होते हैं, पितृ पक्ष के दौरान लोग पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध आदि करते हैं। गणेश चतुर्थी पूजा सामग्री भगवान गणेश की प्रतिमा, लाल कपड़ा, जनेऊ, दूर्वा, कलश, नारियल, रोली, पंचामृत, मौली लाल, पंचमेवा, गंगाजल विशेष रहता है।
कई जनपदों व प्रांतों से आये मूर्तिकारों ने जमाया डेरा
फर्रुखबाद। भगवान गजानन की स्वनिर्मित मूर्तियों को बेंचने के लिए मैनपुरी प्रजापति कालोनी से आये जयचन्द्र व रामसिंह सपरिवार यहीं रह रहे है। मिशन कम्पाउंड के बाहर फुटपाट पर दुकान सजाये हुए है। जयचन्द्र ने बताया कि यह उनका पुस्तैनी काम है और वह पूरे वर्ष तक परिवार के साथ गजानन की मूर्तियां बनाने में लगे रहते है। उन्होंने बताया कि १०० रुपये लेकर ७ हजार तक की मूर्तियां उनके पास है, लेकिन अधिकांश बिक्री २ हजार से लेकर ४ हजार रुपये तक की मूर्तियों की होती है। उनके भाई रामसिंह ने बताया कि पूर्वजों के समय से वह मूर्तियां बनाने का कार्य करते है, इस वह १०० मूर्तियां लेकर आये है। उनके साथ उनके पुत्र अमित भी दुकान सजा रहे है। मूर्तियों को बरसता से बचाने के लिए पॉलीथिन का इंतजाम किया गया है। यहीं पर नगर के ही मूर्ति विके्रता सोनू मूर्तियों की दुकान लगाये है। जिनके पास १५१ रुपये से लेकर १५०० रुपये तक मूर्तियां है। मूर्ति बिक्री के लिए राजस्थान से आये रमाराम ने बताया कि वह चार महीने पहले यहां आ गये थे और पास के ही संजय कटियार के भट्ठेे पर मूर्तियां निर्मित कर रहे है और बिक्री के लिए लगाये है। १५१ रुपये से लेकर ९ हजार रुपये तक की मूर्ति उनके पास है। उनका कहना है कि बिक्री की बात ग्राहक के ऊपर है। दिन के दिन तक उन्हें सभी मूर्तियां बिक जाने का पूरा भरोसा है।
