समृद्धि न्यूज। डेढ़ साल से ज्यादा समय से चल रहे इजराइल और हमास के बीच के संघर्ष में गाजा की स्थिति बदहाल हो गई है। ऐसे में इस संघर्ष में नया मोड़ तब आया जब कतर में चल रही युद्धविराम वार्ता से अमेरिका ने अपनी टीम वापस बुला ली। राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने हमास पर ईमानदारी से बातचीत न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
गाजा में भुखमरी ने अब विकराल रूप ले लिया है। इजरायल की नाकेबंदी के चलते खाने-पीने की चीजों और दवाइयों की भारी कमी हो गई है, जिसके कारण पिछले 3 हफ्तों में कई बच्चों की जान चली गई। गाजा सिटी के पेशेंट्स फे्रंड्स हॉस्पिटल में हालात इतने खराब हैं कि डॉक्टर बच्चों को बचाने के लिए जरूरी दवाइयां और पौष्टिक खाना नहीं दे पा रहे हैं। पिछले हफ्ते 4 दिनों में 5 छोटे बच्चे भुखमरी की वजह से दम तोड़ गए। ये बच्चे पहले से किसी बीमारी से पीडि़त नहीं थे, फिर भी उनकी हालत इतनी बिगड़ गई कि वे बच नहीं सके।
जमीन पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं
गाजा में हालात बहुत खराब हो गए हैं। बीते रविवार को गाजा में भोजन लेने पहुंचे लोगों पर हमले में कम से कम 85 फलस्तीनी मारे गए, जो अब तक का सबसे खतरनाक दिन बताया जा रहा है। कई हफ्तों से कतर में इजराइल और हमास के बीच बातचीत चल रही थी, जिसमें कुछ हल्की प्रगति तो हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया। मुख्य विवाद यह है कि युद्धविराम के बाद इजरायली सेना को किस हद तक पीछे हटना होगा।
गाजा में भुखमरी की स्थिति
गाजा में स्थिति बेहद खराब है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, करीब एक लाख महिलाएं और बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी भूख से मौत के मामलों में वृद्धि की पुष्टि की है। इस संघर्ष में गाजा की बदहाल होती स्थिति को लेकर 28 पश्चिमी देशों ने इजराइल की निंदा करते हुए युद्ध समाप्त करने की मांग की है। 100 से ज्यादा मानवाधिकार और सहायता संगठनों ने भी कहा है कि वहां के लोग भूख से मर रहे हैं और मदद नहीं पहुंच रही।
कमजोरी के चलते बच्चे रो भी नहीं पाते
हॉस्पिटल की न्यूट्रिशनिस्ट डॉ0 राना सोबोह ने बताया कि बच्चे इतने कमजोर हो गए हैं कि न रो पाते हैं, न हिल पाते हैं। पहले कुछ बच्चे इलाज से ठीक हो जाते थे, लेकिन अब हालात बदतर हैं। ये आपदा है। बच्चे दुनिया के सामने भूख से मर रहे हैं। इससे बुरा कुछ नहीं हो सकता। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले तीन हफ्तों में भुखमरी से 48 लोगों की मौत हुई, जिनमें 20 बच्चे और 28 वयस्क शामिल हैं।
यूएन के विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि करीब एक लाख महिलाएं और बच्चे तुरंत इलाज के मोहताज हैं, लेकिन दवाइयों और खाने की कमी के कारण यह मुमकिन नहीं हो पा रहा। हॉस्पिटल में हर दिन 200 से 300 बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं। डॉ0 राना ने बताया कि कर्मचारी भी भूखे हैं और 2 नर्सों को तो ड्रिप चढ़ानी पड़ी। पिछले हफ्ते मरने वाले 5 बच्चों में 4 की मौत पेट की गड़बड़ी (गैस्ट्रिक अरेस्ट) से हुई, क्योंकि उनके लिए जरूरी पौष्टिक खाना उपलब्ध नहीं था। पांचवीं बच्ची, सिवर जो साढ़े चार साल की थी, के शरीर में पोटैशियम की भारी कमी थी। दवाइयों के अभाव में वह भी तीन दिन बाद आईसीयू में चल बसी।
अमेरिका ने किया अपने सहायता मॉडल का बचाव
वहीं मामले में इजराइल का कहना है कि वह पर्याप्त सहायता भेज रहा है, लेकिन यूएन एजेंसियां कह रही हैं कि इजराइल की पाबंदियों और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण मदद सुरक्षित तरीके से नहीं पहुंच पा रही। हालांकि दूसरी ओर अमेरिका ने अपने सहायता मॉडल का बचाव भी किया। साथ ही कहा कि गाजा में अब तक नौ करोड़ भोजन पहुंचा, जा चुके हैं, लेकिन जमीनी हालात कह रहे हैं कि गाजा अब भी भयंकर मानवीय संकट से जूझ रहा है।
