नौसेना प्रमुख का बड़ा बयान: अरब सागर में हमारे बैटल स्ट्राइक गु्रप तैनात, ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी

समृद्धि न्यूज। ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है, यह बयान नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के0 त्रिपाठी ने मंगलवार को दिया है। चीफ ऑफ नेवल स्टाफ एडमिरल दिनेश त्रिपाठी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की आक्रामक रणनीति का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि कैसे इस ऑपरेशन ने पाकिस्तानी नौसेना को अपने बंदरगाहों तक सीमित रहने के लिए मजबूर कर दिया। नेवी चीफ ने 4 दिसंबर को मनाए जाने वाले नौसेना दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं। इस वर्ष का नेवी डे समारोह केरल के तिरुवनंतपुरम में आयोजित किया जाएगा। एडमिरल त्रिपाठी ने कहा कि मई में भारत की तरफ से शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है और नौसेना ने तब से लेकर अब तक अभियानगत तैयारी जारी रखी है।

पाकिस्तान से तनाव के बीच नौसेना की निगरानी पश्चिमी अरब सागर क्षेत्र तक बढ़ी है। नौसेना प्रमुख ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की आक्रामक रणनीति और कैरियर बैटल गु्रप की तुरंत तैनाती से पाकिस्तानी नौसेना मकरान तट पर अपने बंदरगाहों के पास ही रहने को मजबूत हो गई थी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान पर आर्थिक दबाव बढ़ा है, क्योंकि बड़ी संख्या में व्यापारी पोत इस देश में जाने से बच रहे हैं। साथ ही पाकिस्तान जाने वाले पोतों की बीमा की राशि भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत होते ही हमने अपने कैरियर बैटल ग्रुप आईएनएस विक्रांत समेत कई अन्य बहुत ही आक्रामक तरीके से तैनात कर दिया था, यही वजह है कि पाकिस्तान चाहकर भी अपनी नौसेना को कराची पोर्ट से बाहर नहीं निकाल सका। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन अब भी जारी है और हमारी आक्रामकता की वजह से पाकिस्तान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। नौसेना प्रमुख ने कहा कि खुद प्रधानमंत्री भी इस साल दिवाली के मौके पर आईएनएस विक्रांत पर रात बिताने गए थे और उन्होंने बहुत करीब से पूरी तैयारी देखी। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान पर वित्तीय दबाव पड़ा है, क्योंकि संघर्ष के बाद बड़ी संख्या में व्यापारिक जहाजों ने पाकिस्तान की यात्रा करने से परहेज किया है। सेना प्रमुख ने कहा कि पिछले नौसेना दिवस के बाद हमने अब तक 12 युद्धपोत शामिल किए हैं, और जो भी कुछ उन्होंने कहा, वो कुछ इस तरह हैं। आईएनएस उदयगिरि का जलावतरण रक्षा मंत्री द्वारा अगस्त में विशाखापत्तनम में किया गया था। यह हमारे अपने युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया 100वां युद्धपोत था, इसे मनाने के लिए जहाज निर्माण के माध्यम से राष्ट्र निर्माण शीर्षक से एक सेमिनार आयोजित किया था। पहला जलावतरण पोत आईएनएस माहे है, जिसका जलावतरण 24 नवंबर को किया गया था, यह अपनी तरह का पहला युद्धपोत है, जिसका डिजाइन और निर्माण किसी निजी भारतीय डिजाइनर ने किया है, इसका जिक्र प्रधानमंत्री ने मन की बात में भी किया था। वर्तमान में विभिन्न शिपयार्ड, डीपीएसयू, पीएसयू और निजी शिपयार्ड में 51 प्लेटफॉर्म निर्माणाधीन हैं। एडमिरल त्रिपाठी ने बताया कि जल्द ही स्वदेशी न्यूक्लियर बैलिस्टिक सबमरीन आईएनएस अरिदमन को जल्द ही नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि नौसेना को उम्मीद है कि 2029 तक राफेल-एम के चार लड़ाकू विमानों का पहला बेड़ा मिल जाएगा। उन्होंने इसके अलावा प्रोजेक्ट 75 की भी जानकारी दी, जिसके तहत भारत को छह आधुनिक सबमरीन खरीदनी हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए बातचीत जारी है और जल्द ही अनुबंध पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। हमने एनएमडीए (राष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र जागरूकता) परियोजना के लिए भी अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *