समृद्धि न्यूज। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार 10 मई को भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने का दावा कर चुके हैं। भारत ट्रंप के इन दावों को लगातार खारिज करता रहा है। अब पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे की पोल खोल दी। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भारत से बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उनका कहना है कि पाकिस्तान भारत के साथ बातचीत की कई बार कोशिश कर चुका है, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। माना जा रहा है कि भारत से रिश्ते बिगडऩे के बाद पाकिस्तान की हालात ज्यादा खराब हो गई है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा खुलासा किया है। डार ने स्वीकार किया है कि भारत ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और अपने बीच किसी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के लिए कभी सहमत नहीं हुआ था। इस तरह उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को खारिज कर दिया कि उन्होंने पहलगाम हमले के बाद उपजे तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत को पाकिस्तान के साथ मध्यस्थता करने के लिए कहा था। डार ने कहा कि जब इस्लामाबाद ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के सामने ट्रंप के मध्यस्थता के दावे को उठाया, तो शीर्ष अमेरिकी राजनयिक ने स्पष्ट कर दिया कि भारत ने हमेशा यह कहा है कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दे पूरी तरह से द्विपक्षीय हैं और इसमें किसी तीसरे की कोई जरूरत नहीं है। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि हम भारत के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं, भारत जिस तरह चाहता है उस तरह बात की जाएगी, लेकिन हम इसके लिए भीख नहीं मानेंगे। अगर कोई देश बातचीत करना चाहता है तो हम इसका स्वागत करेंगे, क्योंकि बातचीत से ही हल निकलते हैं। उन्होंने दावा किया है कि पाक शांतिप्रिय देश है, अगर भारत बात करना नहीं चाहता है तो हम भी उन पर दबाव नहीं डालेंगे। भारत और पाकिस्तान के बीच 10 मई को संघर्ष विराम के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दावा कई बार किया था। उन्होंने 30 से ज्यादा बार दोनों देशों में संघर्ष विराम कराए जाने का दावा कर चुके हैं। ट्रंप ने कई मंचों से कहा कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को खत्म करने में मदद की थी। उन्होंने कहा था कि अगर दोनों देश संघर्ष को रोक देंगे तो अमेरिका उनके साथ व्यापार को बढ़ाएगा।
पाकिस्तान ने ही ट्रंप के दावे की खोल दी पोल, ऑपरेशन सिंदूर में नहीं हुई थी मध्यस्थता
