पंजाब एंड सिंध बैंक के टेंडर प्रक्रिया में भ्रष्टाचार: फर्रुखाबाद में पारदर्शिता पर उठे सवाल

लखनऊ, समृद्धि न्यूज। पंजाब एंड सिंध बैंक के लखनऊ अलीगंज ज़ोनल ऑफिस में टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, बैंक के ज़ोनल मैनेजर  सतबीर सिंह द्वारा टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता को दरकिनार कर भ्रष्ट आचरण अपनाया गया, जिससे न केवल बैंक को आर्थिक नुकसान हुआ बल्कि सरकार की “जीरो टॉलरेंस फॉर करप्शन” नीति की अवहेलना भी हुई। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने बैंक के लिए अपनी दो प्रॉपर्टी (एक स्वयं के नाम और दूसरी अपने पिता के नाम) टेंडर प्रक्रिया में सम्मिलित की थीं। प्रारंभ में ज़ोनल मैनेजर ने सूचित किया कि केवल दो बिड प्राप्त हुई हैं, लेकिन बिड ओपनिंग के दिन 9 दिसंबर 2024 को यह बताया गया कि कुल पाँच बिड आई हैं।

रिश्वत की माँग और टेंडर रद्द

शिकायतकर्ता के अनुसार, 27 दिसंबर 2024 को ज़ोनल मैनेजर अपनी टीम के साथ उनकी दोनों प्रॉपर्टी और अन्य टेंडर की गई जगहों का निरीक्षण करने पहुंचे। निरीक्षण के बाद उन्होंने शिकायतकर्ता की एक प्रॉपर्टी को फाइनल करने की बात कही, लेकिन इसके लिए छह महीने का एडवांस किराया देने को कहा गया। शिकायतकर्ता ने जब यह स्वीकार किया, तो ज़ोनल मैनेजर ने कथित रूप से रिश्वत की माँग रखी। रिश्वत देने से इनकार करने पर टेंडर को रद्द कर दिया गया और एक नया टेंडर निकाला गया, जिसमें “मेन मार्केट ऑफ फर्रुखाबाद सिटी” की नई शर्त जोड़ दी गई, ताकि शिकायतकर्ता की प्रॉपर्टी अयोग्य हो जाए।

बैंक और सरकार की नीति को झटका

शिकायतकर्ता ने बताया कि उनकी प्रॉपर्टी फर्रुखाबाद हाईवे के निकट स्थित है, जहाँ एशिया की सबसे बड़ी आलू मंडी, कई कार शोरूम, ट्रांसपोर्ट नगर, चार मेडिकल कॉलेज, दो लॉ कॉलेज, छह पेट्रोल पंप और आठ कोल्ड स्टोरेज हैं। ऐसे स्थान पर बैंक की शाखा स्थापित करना बेहद लाभकारी होता, लेकिन ज़ोनल मैनेजर के कथित भ्रष्टाचार के कारण बैंक को संभावित व्यावसायिक लाभ से वंचित कर दिया गया।

जाँच और कार्रवाई की माँग

शिकायतकर्ता ने पंजाब एंड सिंध बैंक के प्रबंध निदेशक (MD) से मामले की निष्पक्ष जाँच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की है। उन्होंने टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए आवश्यक सुधार करने की अपील की है। बैंक प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो यह सरकार की भ्रष्टाचार विरोधी नीति के खिलाफ एक गंभीर चुनौती साबित हो सकता है।

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