
भारत के अपने नए आपराधिक कानूनों के लागू होने से कई अपराधों में सजा बढ़ा दी गई है। वहीं सजा के प्रावधान में कुछ नए अपराध जोड़े गए हैं। नए कानूनों के आने से धाराएं बदल जाएंगी। आईपीसी में 511 धाराएं थीं, जबकि भारतीय न्याय संहिता में 358 धाराएं होंगी। हत्या के लिए लगाई जाने वाली IPC की धारा 302 अब धारा 101 कहलाएगी। ठगी के लिए लगाई जाने वाली धारा 420 अब धारा 316 होगी। हत्या के प्रयास के लिए लगाई जाने वाली धारा 307 अब धारा 109 कहलाएगी। वहीं दुष्कर्म के लिए लगाई जाने वाली धारा 376 अब धारा 63 होगी। इसी प्रकार अन्य धाराओं में भी फेरबदल हुआ है। कई धाराएं हटा दी गईं हैं तो वहीं कई धाराएं नई जोड़ी गई हैं। हालांकि, हिट एंड रन केस का संबंधित प्रावधान तुरंत लागू नहीं होगा। केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने जनवरी में कहा था कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 (2) को लागू करने का फैसला अखिल भारतीय मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) से सलाह के बाद ही लिया जाएगा। इधर सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं. अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं होंगी। यहां 177 धाराओं को बदल दिया गया है। 9 नई धाराएं जोड़ी गईं हैं और 14 धाराओं को खत्म कर दिया गया है। वहीं इंडियन एविडेंस एक्ट में पहले 167 धाराएं थीं। जबकि भारतीय साक्ष्य संहिता में 170 धाराएं होंगी। 24 घाराओं में बदलाव किया गया है। दो नई धाराएं जुड़ीं हैं। 6 धाराएं खत्म हो गईं हैं।
