सुप्रीम कोर्ट का फैसला: LMV लाइसेंस धारक 7500 KG तक वजन वाले ट्रांसपोर्ट वाहन चलाने के हकदार

सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने हल्के मोटर वाहन (एलएमवी) का ड्राइविंग लाइसेंस रखने वाले व्यक्तियों को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने व्यवस्था दी है कि एलएमवी का ड्राइविंग लाइसेंस रखने वाला व्यक्ति 7,500 किलोग्राम से कम वजन वाले परिवहन वाहन को चलाने के हकदार हैं। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ इस पर फैसला सुनाया। यह कानूनी सवाल दुर्घटना मामलों में बीमा कंपनियों की तरफ से मुआवजे के दावों के विवादों का कारण बन रहा था, जिनमें एलएमवी ड्राइविंग लाइसेंस धारकों की तरफ से ट्रांसपोर्ट वाहन चलाए जा रहे थे।

सिर्फ हल्के वाहन चालकों के कारण नहीं होते हादसे!

संविधान पीठ में चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस ऋषिकेश रॉय, जस्टिस पीएस नरसिम्हा, जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस मनोज मिश्रा शामिल हैं. फैसला सुनाते हुए जस्टिस हृषिकेश रॉय ने कहा, ‘सड़क सुरक्षा विश्व स्तर पर एक गंभीर सार्वजनिक मुद्दा है. और भारत में सड़क दुर्घटनाओं के कारण 1.7 लाख लोग मारे गए. यह कहना कि यह सब हल्के वाहन चालकों के कारण हुआ, निराधार है. इसके पीछे सीट बेल्ट नियमों का पालन न करना, मोबाइल का उपयोग, नशे में होना आदि कारण हैं. वाहन चलाने के लिए विशेष कौशल की आवश्यकता होती है. सड़क की ढलानों को संभालने के लिए ध्यान देने और ध्यान भटकाने से बचने की आवश्यकता होती है.

लाइसेंसिंग व्यवस्था स्थिर नहीं रह सकती’

जस्टिस हृषिकेश रॉय ने फैसला सुनाया, ‘ इस अदालत का निर्णय हल्के वाहन धारकों द्वारा बीमा दावा करने में भी मदद करेगा, जो 7500 किलोग्राम से कम वजन वाले वाहन चलाते हुए पाए जाते हैं. लाइसेंसिंग व्यवस्था स्थिर नहीं रह सकती. हम आशा करते हैं कि मौजूदा खामियों को दूर करने के लिए उपयुक्त संशोधन किए जाएंगे. अटॉर्नी जनरल ने आश्वासन दिया है कि ऐसा ही किया जाएगा.’

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