यज्ञशाला में बिना अवकाश के सम्पन्न हुआ 5500वाँ यज्ञ

सुख, शान्ति और आनन्द के लिए नित्य करें यज्ञ, सम्पूर्ण विश्व की नाभि है, यज्ञ – डॉ० राजेश

हरदोई। कायाकल्पकेन्द्रम् स्थित यज्ञशाला में 5500वें यज्ञ के शुभ अवसर पर शहीद उद्यान का वातावरण वैदिक मंत्रों की मंगल ध्वनि से गुंजायमान हो उठा। यहां प्रातः और सायं काल दोनों समय संध्या-हवन किया जाता है। विशेष बात यह है कि यज्ञशाला में बिना अवकाश के 5500 यज्ञ सम्पन्न हुए।
शहीद उद्यान स्थित कायाकल्पकेन्द्रम् के संस्थापक व सीनियर नेचरोपैथ डॉ० राजेश मिश्र ने अपने सदस्यों के साथ ५५००वें यज्ञ में आहुतियां देने के बाद अपने अनुभव बताते हुए कहा कि यज्ञ सर्वश्रेष्ठ कर्म है। यज्ञ को सम्पूर्ण विश्व की नाभि कहा गया है। कहा जैसे गर्भस्थ शिशु को नाभि से पोषण मिलता है, ठीक वैसे ही यज्ञ से सम्पूर्ण वातावरण, स्थावर-जंगम पुष्ट होता है।
डॉक्टर मिश्र ने कहा कि नित्य यज्ञ करने से तन-मन स्वस्थ रहता है, चित्त प्रसन्न रहता है और रचनात्मक कार्यों में मन लगता है। कहा स्वास्थ्य पहली आवश्यकता है; इसलिए स्वयं अपने तथा अपने परिजनों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए नित्य यज्ञ करें। डॉक्टर मिश्र ने कहा कि देवताओं का मुख अग्नि है। अग्नि में आहुतियां देने से सभी देवता प्रसन्न होते हैं और मनुष्य को सुख, संतोष, शान्ति तथा आनन्द की प्राप्ति होती है।
डॉ अभिषेक पाण्डेय, डॉ सरल कुमार, दीपाली, नन्द किशोर सागर, शिवकुमार, गोविन्द गुप्त, सोनू सेठ, श्रीओम पाण्डेय, विवेक त्रिवेदी ने आहुतियां डालीं।

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