महाशिवरात्रि के दिन विशेष: भोलेनाथ की पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पौराणिक कथा

महाशिवरात्रि का व्रत फाल्गुन मास की के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को किया जाता है. इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है. कहते हैं इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए कुछ स्थानों पर महादेव के विवाह के लिए बारत भी निकालने की परंपरा है. हर जगह इस दिन अलग-अलग तरह से पूजा की जाती है, लेकिन हर में शुभ मुहूर्त में पूजा करने का खास महत्व होता है. मान्यता है कि शिवारात्रि के दिन शुभ मुहूर्त में पूरे विधि-विधान से पूजा करने वालों के जीवन में चल रही तमाम परेशनियां दूर होती हैं. वहीं विवाह में आ रही बाधाएं दूरी होती है. इसके अलावा भगवान शिव की कृपा से सभी कार्यों में सफलता मिलती है.

महाशिवरात्रि से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव का विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्री देवी सती के साथ हुआ था। दक्ष महादेव को पसंद नहीं करते थे इसलिए उन्होंने शिव जी को अपने दामाद के रूप में कभी नहीं स्वीकारा। एक बार दक्ष प्रजापति ने विराट यज्ञ का आयोजन करवाया जिसमें उन्होंने भगवान शिव और माता सती को छोड़कर हर किसी को निमंत्रण दिया। इस बात की जानकारी जब माता सती को लगी तो वह बहुत दुखी हुई लेकिन फिर भी वहां जाने का निर्णय ले लिया। महादेव के समझाने के बाद भी सती जी नहीं रुकी और यज्ञ में शामिल होने के लिए अपने पिता के घर पहुंच गई। सती को देख  प्रजापति दक्ष अत्यंत क्रोधित हुए और उन्होंने भगवान शिव का अपमान करना शुरू कर दिया। भगवान शिव के लिए दक्ष द्वारा कहे गए वाक्य और अपमान को माता सती सहन नहीं कर पाई और उन्होंने उसी यज्ञ कुंड में खुद को भस्म कर लिया।

इसके बाद कई हजारों साल बाद देवी सती का दूसरा जन्म पर्वतराज हिमालय के घर हुआ। पर्वतराज के घर जन्म लेने की वजह से उनका नाम पार्वती पड़ा। शिवजी से विवाह करने के लिए माता पार्वती को काफी कठोर तपस्या करनी पड़ी थी। कहते हैं कि उनके तप को लेकर चारों तरफ हाहाकर मचा हुआ था। मां पार्वती ने अन्न, जल त्याग कर वर्षों भोलेनाथ की उपासना की।  इस दौरान वह रोजाना शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाती थी, जिससे भोले भंडारी उनके तप से प्रसन्न हो। आखिर में देवी पार्वती के तप और निश्छल प्रेम से शिवजी प्रसन्न हुए और उन्हें अपनी संगिनी के रूप में स्वीकार किया। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा था कि वह अब तक वैराग्य जीवन जीते आए हैं और उनके पास अन्य देवताओं की तरह कोई राजमहल नहीं है, इसलिए वह उन्हें जेवरात, महल नहीं दे पाएंगे। तब माता पार्वती ने केवल शिवजी का साथ मांगा और शादी बाद खुशी-खुशी कैलाश पर्वत पर रहने लगी। आज शिवजी और माता पार्वती का वैवाहिक जीवन सबसे खुशहाल है और हर कोई उनके जैसा संपन्न परिवार की चाह रखता है।

महाशिरात्रि पूजा का शुभ मुहूर्त

महाशिवरात्रि के दिन निशिता काल में पूजा करने का खास महत्व है. पंचांग के अनुसार, इस दिन निशिता काल 26 फरवरी की रात 12 बजकर 9 मिनट से लेकर 12 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. इस दौरान भक्तों को पूजा के लिए सिर्फ 50 मिनट का समय मिलेगा. इसके अलावा महाशिवरात्रि के दिन रात्रिजागरण का विशेष महत्व है और रात्रि में चार पहर की पूजा करना भी बहुत शुभ होता है, जिसका शुभ मुहूर्त कुछ इस प्रकार है-

  • रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय शाम 06 बजकर 19 मिनट से रात्रि 09 बजकर 26 मिनट तक रहेगा.
  • रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय 09 बजकर 26 से फरवरी 27 को रात्रि 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा.
  • रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय 27 फरवरी को रात्रि 12 बजकर 34 मिनट से 03 बजकर 41 मिनट तक रहेगा.
  • रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय 27 फरवरी सुबह 03 बजकर 41 मिनट से सुब 06 बजकर 48 मिनट तक रहेगा.

महाशिवरात्रि पूजन सामग्री

महाशिवरात्रि की पूजा के लिए जरूरी साम्रगी पहले से एकत्रित कर लेनी चाहिए. जोकि इस प्रकार है- धूप, दीप, अक्षत, सफेद, घी, बेल, भांग, बेर, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, गंगा जल, कपूर, मलयागिरी, चंदन, पंच मिष्ठान, शिव व मां पार्वती के श्रृंगार की सामग्री,पंच मेवा, शक्कर, शहद, आम्र मंजरी, जौ की बालियां, वस्त्राभूषण, चंदन, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, दही, फल, फूल, बेलपत्र, धतूरा, तुलसी दल, मौली जनेऊ, पंच रस, इत्र, गंध रोली, कुशासन आदि.

महाशिवरात्रि पूजा विधि

महाशिवरात्रि के दिन व्रत और महादेव की पूजा करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें. उसके बाद व्रत संकल्प लें. घर के पास किसी मंदिर में जाकर भगवान शिव और माता पार्वती के साथ पूरे शिव परिवार का षोटशोपचार पूजन करें. शिवलिंग पर सबसे पहले जल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, चंदन इत्यादि चीजें चढ़ाएं. भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें. व्रत कथा का पाठ करें और अंत में आरती करने के बाद पूजा संपन्न करें. अगर घर पर ही पूजा करना चाहते हैं तो पूजा स्थल की साफ-सफाई कर लें. उसके बाद पूरे विधि विधान से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करे. इस दिन रात्रि जागरण और पूजन का विशेष महत्व है, इसलिए रात्रि पूजन से पहले स्नान अवश्य करें उसके बाद पुन: विधि-विधान से महादेव की पूजा करें.

भगवान शिव के मंत्र

ॐ ऊर्ध्व भू फट् । ॐ नमः शिवाय । ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय । ॐ नमो भगवते दक्षिणामूर्त्तये मह्यं मेधा प्रयच्छ स्वाहा । ॐ इं क्षं मं औं अं । ॐ प्रौं ह्रीं ठः । ॐ नमो नीलकण्ठाय । ॐ पार्वतीपतये नमः । ॐ पशुपतये नम:।

महामृत्युंजय मंत्र का करें जाप

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् | उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्||

माशिवरात्रि व्रत पारण का समय

महाशिवरात्रि व्रत का पारण शुभ मुहूर्त गुरुवार 27 फरवरी को सुबह 6 बजकर 48 मिनट से लेकर 8 बजकर 534 मिनट तक रहेगा. इस दौरान व्रत करने वाले भक्त भोलेनाथ की पूजा करने के बाद व्रत का पारण कर सकते हैं.

राशि अनुसार करें शिव जी का अभिषेक

  1. महाशिवरात्रि के दिन मेष राशि वालों को शुद्ध शहद से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  2. इस दिन वृषभ राशि वालों को गाय के कच्चे से दूध शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  3. इस दिन मिथुन राशि वालों को गन्ने के रस में बेलपत्र मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  4. इस दिन कर्क राशि वालों को शुद्ध घी से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  5. इस दिन सिंह राशि वालों को शहद मिश्रित गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  6. इस दिन कन्या राशि वालों को भांग मिश्रित गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  7. इस दिन तुला राशि वालों को पंचामृत से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  8. इस दिन वृश्चिक राशि वालों को सुगंध मिश्रित गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  9. इस दिन धनु राशि वालों को दूध में केसर मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  10. इस दिन मकर राशि वालों को काले तिल मिश्रित दूध से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  11. इस दिन कुंभ राशि वालों को गंगाजल में पान के पत्ते मिलाकर शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.
  12. इस दिन मीन राशि वालों को दूर्वा मिश्रित गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *