समृद्धि न्यूज। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की भारत पर टैरिफ बढ़ाने की धमकी के बाद विदेश मंत्रालय ने करारा जवाब दिया है। भारत ने तेल आयात को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है, भारत ने कहा है कि यह उपभोक्ताओं के हित में है, आलोचना करने वाले देश पहले खुद को देखें। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ वाली धमकी पर भारत ने कड़ा जवाब दिया है। भारत ने कहा है कि आरोप लगाने वाले देश पहले खुद को देखें। भारती विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसाल ने कहा है कि आलोचना करने वालों का रूस के साथ व्यापार को लेकर कैसे तकलीफ हो रही है जबकि यूरोपियन यूनियन का रूस से 67.5 बिलियन यूरो का व्यापार है।
मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, भारत ने रूस से तेल इसलिए खरीदा क्योंकि पहले जहां से तेल आता था, वहां का तेल युद्ध के कारण अब यूरोप को भेजा जाने लगा था। जायसवाल ने कहा कि उस समय अमेरिका ने भी भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था, ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रहे। भारत जो भी तेल रूस से मंगवा रहा है, उसका मकसद यही है कि देश में उपभोक्ताओं को सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा मिल सके। जायसवाल ने यूरोपीय संघ को भी आड़े हाथों लिया है, जिसने भारतीय तेल रिफाइनरी को उनके निर्यात को लेकर निशाना बनाया है। उन्होंने कहा कि रूस से तेल आयात करना भारत की एक मजबूरी है, जो वैश्विक बाजार की स्थिति के कारण है। उन्होंने यह भी कहा कि जो देश भारत की आलोचना कर रहे हैं, वही खुद रूस के साथ व्यापार कर रहे हैं।
आरोप लगाने वाले देश पहले खुद को देखें
विदेश मंत्रालय ने कहा कि रूस से तेल आयात करने के कारण भारत अमेरिका और यूरोपीय संघ के निशाने पर है। दरअसल, भारत ने रूस से आयात इसलिए शुरू किया क्योंकि जंग शुरू होने के बाद तेल की आपूर्ति यूरोप की ओर मोड़ दी गई थी। उस समय, अमेरिका ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता को मजबूत करने के लिए भारत द्वारा इस तरह के आयात को सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया था। मंत्रालय ने आगे कहा कि भारत के आयात का उद्देश्य भारतीय उपभोक्ताओं के लिए अनुमानित और किफायती ऊर्जा लागत सुनिश्चित करना है। भारत की आलोचना करने वाले देश खुद रूस के साथ व्यापार में लिप्त हैं।
सरकार ने इन देशों के रूस के साथ व्यापार के आंकड़े भी पेश किए। उसने बताया कि 2024 में यूरोपीय संघ और रूस के बीच 67.5 अरब यूरो का वस्तु व्यापार हुआ। इसके अलावा 2023 में सेवा व्यापार 17.2 अरब यूरो था। यह भारत और रूस के बीच हुए कुल व्यापार से काफी अधिक है। यूरोपीय देशों ने 2024 में रूस से रिकॉर्ड 16.5 मिलियन टन तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात की, जो 2022 के 15.21 मिलियन टन के पिछले रिकॉर्ड से अधिक है।
भारत ने कहा कि यूरोप-रूस ट्रेड में केवल एनर्जी ही नहीं, बल्कि फर्टिलाइजर, माइनिंग प्रोडक्ट, केमिकल, आयरन एंड स्टील, मशीनरी और परिवहन ट्रांसपोर्ट भी शामिल हैं। जहां तक अमेरिका का सवाल है, वह अपने न्यूक्लियर इंडस्ट्री के लिए रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, अपने इलेक्ट्रिक वाहन इंडस्ट्री के लिए पैलेडियम, फर्टिलाइजर और केमिकल आयात करता रहता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इसलिए भारत को निशाना छोड़ दें, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा।
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा, भारत रूस से भारी मात्रा में न सिर्फ तेल खरीद रहा है, बल्कि उस तेल के बड़े हिस्से को खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा भी कमा रहा है। इसके साथ ही ट्रंप ने कहा, भारत को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि यूके्रन में रूस की युद्ध मशीन कितने लोगों की जान ले रही है। इसी वजह से मैं भारतीय सामान पर अमेरिका में टैरिफ को काफी बढ़ाने जा रहा हूं। इस मुद्दे पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद!
