विवेचना में घोर लापरवाही बरतने वाले विवेचक पर न्यायालय सख्त

पुलिस महानिदेशक को कार्यवाही के लिए लिखा पत्र
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। जानलेवा हमले के मामले में विवेचक के द्वारा विवेचना में घोर लापरवाही बरतने के मामले अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट राकेश कुमार सिंह ने विवेचक के विरुद्ध पुलिस महानिदेशक लखनऊ को कार्यवाही करने के लिए पत्र लिखा है।८ मई २०१३ को मोहम्मदाबाद में चार अभियुक्त विकास कुमार, बब्लू, दीपक सक्सेना एवं सत्यनारायन के विरुद्ध धारा ३०७/३४ के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। मामले की विवेचना वरिष्ठ उपनिरीक्षक श्रीकान्त यादव के द्वारा प्रारम्भ की गई थी और इनके द्वारा अभियुक्त विकास, बब्लू, दीपक के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया था। विवेचक द्वारा विकास सक्सेना की निशानदेही से अवैध तमंचा बरामद कराया गया था। जिसके वादी स्वयं उपनिरीक्षक थे। परन्तु उन्होंने धारा ३०७ की विवेचना के साथ धारा ३/२५/२७ आयुध अधिनियम की विवेचना कर संयुक्त आरोप पत्र प्रस्तुत किया था। जिस पर न्यायालय के द्वारा आपत्ति करने के उपरान्त भूल सुधार की गई। निर्णय के दौरान यह तथ्य/साक्ष्य प्रकाश में आया कि मजरुब समाजवादी पार्टी का कार्यकर्ता था। उसने पूर्व में अभियुक्तगण विकास सक्सेना एवं सत्यनारायन के विरुद्ध अपने घर में चोरी करने का आरोप लगाया था। पुलिस दोनों को पकडक़र थाने ले गयी थी। आरोप निराधार होने के कारण उस मामले में विवेचक द्वारा अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी। जिस पर मजरुब मुस्तकीम के परिवार वालों द्वारा थाने में हंगामा किया गया था। जिसमें तेजाब की बोतले, फायरिंग इत्यादि की गई थी। जिसमें मुस्तकीम व उसके परिवार वालों के विरुद्ध धारा १४७, १४८, १४९, ५०४, ५०६ एवं ७ क्रिमिनल लॉ एमेण्डमेण्ट एक्ट का मुकदमा दर्ज कराया गया था। जो अभी विचाराधीन है। ६ माह बाद मुस्तकीम के भाई शमीम ने मुकदमा दर्ज कराते हुए दर्शाया कि इन लोगों ने मेरे भाई को तीन गोलियां मारी जो उनके पेट में लगी। विवेचक द्वारा पेपर कटिंग साक्ष्य के रुप में न्यायालय में प्रस्तुत की। गोली लगने के उपरान्त लखनऊ में इलाज कराने की बात बतायी गई, परन्तु चिकित्सक प्रपत्र इलाज के संबंध में पत्रावली में दाखिल नहीं किया गया। वादी मुकदमा भी घटना का प्रत्यक्षदर्शी साक्षी साबित नहीं हुआ। जिस दुकान के सामने घटना होना बताया कि उस दुकानदार ने दुकान के सामने घटना घटित न होना बताया। प्रथम सूचना लेखक द्वारा भी अपने साक्ष्य में बताया कि मजरुब जब थाने आया तब मंैने उसके शरीर पर गोली की चोट नहीं देखी। विकास सक्सेना की निशानदेशही पर जो तमंचा बरामद होना विवेचक श्रीकान्त यादव द्वारा दर्शाया गया वह संदिग्ध कराई गयी। क्योंकि तमंचा बरामदगी से पूर्व विवेचक द्वारा अपने कर्मचारियों के साथ उस स्थान पर कथित बरामदगी स्थल तमंचा/पिस्टल पर जाकर संदिग्ध वस्तुओं को तलाश किये थे। इस बात को उन्होंने अपने साक्ष्य में स्वयं बताया है। अभियोजन के द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों के साक्ष्य का सम्यक परिशीलन करने के बाद यही साबित हुई कि वास्तव में कथित घटना के दिन ऐसी घटना घटी ही नहीं थी। विवेचक श्रीकान्त यादव द्वारा घटना की सत्यता को पूरी तरह नजर अंदाज करते हुए अभियुक्तों के विरुद्ध जो आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया था। जो उनके द्वारा इस विवेचना में की गई घोर उपेक्षा को परिलक्षित करता है। जिस पर अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट राकेश कुमार सिंह ने विवेचक के विरुद्ध पुलिस महानिदेशक लखनऊ को कार्यवाही करने के लिए पत्र लिखा है। जिसमें कहा कि ऐसी स्थिति में आपसे अनुरोध है कि विवेचक के द्वारा की गयी घोर उपेक्षापूर्ण विवेचना के संबंध में विवेचक के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही सम्पादित कराये। जिससे भविष्य में निष्पक्ष विवेचना हो सके।

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