हर्षोल्लास के साथ परंपरागत तरीके से आयोजित किया गया महान गुरमत समागम।

समृद्धि न्यूज़ अयाेध्या।दुनिया का हर बंदा एक ही ईश्वर की संतान हैं इसलिए समाज में ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाकर सभी को गले लगाएं और साथ ही गरीबों और असहायों की मदद करें।सोमवार को महान गुरमत समागम के मौके पर उदगाररुपी यह उपदेश नानकसर सींघड़ा करनाल से आए संत बाबा अमरजीत सिंह भाेला ने बड़ी तादाद में पहुंचे श्रद्धालुओं को दिया दिया।वो रामनगरी स्थित ऐतिहासिक श्री गुरूनानक गाेबिंद धाम गुरूद्वारा नजरबाग में बंदी छोड़ दिवस के उपलक्ष में आयोजित वृहद कार्यक्रम को बतौर धर्म गुरु संबोधित कर रहे थे।उनके साथ आई बीबी सिमरन कौर दिल्ली वाली,भाई परमजीत सिंह नौतनवा वाले और भाई सतबीर सिंह लखनऊ वाले ने कथा और कीर्तन द्वारा संगतों और श्रद्धालुओं को गुरु चरणों से जोड़ा।कार्यक्रम की शुरुआत श्री अखंड पाठ साहिब जी की समाप्ति के साथ हुई जिसके बाद समागम में मनमोहक संगीतमयी गुरवाणी कीर्तन और कथा विचार के साथ दोपहर बाद अरदास की गई और फिर वृहद लंगर शुरू हुआ जिसमें बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।कार्यक्रम के दौरान गुरूद्वारा नजरबाग के जत्थेदार बाबा महेंद्र सिंह ने बताया कि दीपावली पर्व पर सिक्खाें के छठवें गुरु हरगाेबिंद साहिब जी का ग्वालियर किले से अमृतसर आगमन हुआ था।उन्होंने ग्वालियर के किले से 52 राजाओं काे जहांगीर की कैद से मुक्त कराया था और फिर हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) पहुंचे थे।उस वक्त स्वर्ण मंदिर व पूरे अमृतसर शहर काे दियाें की राेशनी से सजाया गया था।इस दिन काे दाता बंदी छाेड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है अर्थात बंधनाें से मुक्त कराने वाले दाता का खास दिन।इस अवसर पर अयोध्या में हर वर्ष दीपावली के दूसरे दिन महान गुरमत समागम का आयाेजन किया जाता है।इसी क्रम में सेवादार नवनीत सिंह ने बताया कि गुरूद्वारा नजरबाग बहुत ही पाैराणिक स्थल है जो कि सिक्ख धर्म के प्रथम गुरु गुरूनानक देव जी और दसवें गुरू गाेबिंद सिंह जी की चरण छू प्राप्त है।अमर शहीद संत बाबा राम सिंह जी की प्रेरणा एवं संत बाबा त्रिलोचन सिंह जी व समूह पूर्वांचल की साध संगत तथा प्रबंधक कमेटियों के सहयोग से 17 वर्षाें से अनवरत यहां महान गुरमत समागम मनाया जाता है। कार्यक्रम के दौरान कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह‌ सहित रामनगरी के जिले के कई जनप्रतिनिधियों,संतों,महंतों और संभ्रांत व्यक्तियों ने गुरुद्वारा पहुंच कर माथा टेका और प्रसाद ग्रहण किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *