लोक अदालत की मूल भावना में समाहित है लोक कल्याण की भावना-जिला जज

 राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित कराए गए 71501 वाद,कुल समझौता राशि मिली 180385956 रूपए

समृद्धि न्यूज़ अयोध्या। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वाधान में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा निर्देश पर शनिवार को जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।यह आयोजन जनपद न्यायाधीश रणंजय कुमार वर्मा के निर्देशन में नोडल अधिकारी दीपक व अपर जिला जज/सचिव अनिल कुमार वर्मा के द्वारा कराया गया।राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश  वर्मा के कर कमलों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया।इस दौरान उनके साथ पीठासीन अधिकारी,भूमि अर्जन,पुनर्वासन एवं पुर्नवयस्थापन प्राधिकरण शिवानी जायसवाल,पीठासीन अधिकारी एम.ए.सी.टी. रविकान्त,अपर जनपद न्यायाधीश सुरेन्द्र मोहन सहाय, राकेश कुमार,विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट निरूपमा विक्रम, अपर जनपद न्यायाधीश रजत वर्मा,प्रतिभा नारायण,सीजेएम सुधांशु शेखर उपाध्याय, एसीजेएम सतीश मगन, बलरामदास प्रत्युश आनंद मिश्रा, एकता सिंह,निवेदिता सिंह, रूपाली सिंह,सोनल उपाध्याय व सहित न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।कार्यक्रम में डी.जी.एम एस.बी.आई लखनऊ मण्डल राघवेन्द्र कुमार, एल.डी.एम. गणेश शंकर,मुख्य प्रबन्धक एस.बी.आई. अभिनव व अन्य लोग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के उद्घाटन का संचालन महेन्द्र सिंह पासवान द्वारा किया गया।इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश श्री वर्मा जी ने संस्कृत के इस श्लोक के ‘‘सर्वे भवन्तु सुखिनः,सर्वे सन्तु निरामया,सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चित् दुःखभाग् भवेत’’ के साथ अपना उद्बोधन प्रारम्भ किया।अपने उद्बोधन में श्री वर्मा ने कहा कि लोक अदालत की मूल भावना में लोक कल्याण की भावना समाहित है।सुलह समझौता के दौरान सभी का मान,सम्मान बना रहे और सभी को न्याय मिले, इसका ध्यान रखा जाता है।उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर आपसी सुलह समझौते के माध्यम से वादों को निस्तारित कराया जाता है।इतिहास में दर्ज है कि सदियों पहले जब अदालतें नहीं हुआ करती थी,तब दो पक्षों के आपसी मतभेद को सुलह समझौता के माध्यम से ही समाज के संभ्रांत व्यक्ति एक निर्धारित स्थल पर बैठकर और दोनों पक्षों की बात सुनकर यह निर्णय लेते थे कि दोनों पक्षों का हित किसमें हैं?इसी को देखते हुए सुलह समझौता कराया जाता था और समाज में इसके सार्थक परिणाम भी दिखाई पड़ता थे।उन्होंने बताया कि सुलह समझौते में दोनों पक्षों के मध्य आपसी क्लेश,मतभेद एवं दुर्भावना समाप्त हो जाती थी।लोक कल्याण के भावना से ओतप्रोत उसी स्वरूप को माननीय उच्चतम न्यायालय और माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विस्तार रूप देते हुए एक स्थल,एक मंच पर बहुत सारे वादों को सुलह समझौता के आधार पर समाप्त कराने के उद्देश्य से राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित कराने के निर्देश दिये जाते हैं,जिसमें दोनों पक्षों के हित के साथ सामाजिक प्रेम भावना भी समाहित है।श्री वर्मा ने कहा कि लोग मिल जुल कर प्रेम भावना से रहे,यही समाज एवं राष्ट्र के हित में है।यदि आपसी मतभेद पनपते भी हैं,तो ऐसे शांति एवं सद्भाव के साथ समाप्त करने का प्रथम प्रयास दोनों पक्षों द्वारा किया जाना चाहिए।उन्होंने बताया कि यदि प्रथम प्रयास में दोनों पक्ष सफल नहीं होते है तभी उन्हें न्यायालय के शरण में जाना चाहिए।उन्होंने बताया कि जनपद न्यायालय परिसर के अतिरिक्त कलेक्ट्रेट एवं सभी तहसीलोें मे भी आपसी सुलह समझौता के आधार पर वादों का निस्तारण कराया जाएगा।इसी क्रम में प्राधिकरण सचिव श्री वर्मा ने कहा कि सुलह समझौते के माध्यम से वादकारी के धन व समय की बचत होती है।लोक अदालत के आयोजन में आने वाले दोनों पक्षों के बैठने,शुद्ध पेयजल आदि की समुचित व्यवस्था करायी गयी है।लोक अदालत में आने वाले सभी व्यक्तियों की सुविधा का ख्याल रखा गया है और यह प्रयास किया जा रहा है कि आज इस वृहद लोक अदालत मे अधिक से अधिक वादों को आपसी सुलह समझौता के माध्यम से समाप्त कराकर लोगों को राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्य का लाभ दिलाया जा सके।उन्होंने बताया की आज संपन्न हुई राष्ट्रीय लोक अदालत में धारा 138 पराक्राम्य लिखत अधिनियम (एन.आई.एक्ट.),बैंक वसूली वाद,श्रम विवाद वाद,विद्युत एवं जनवाद बिल (अशमनीय वादों को छोड़कर),अन्य आपराधिक शमनीय वाद,पारिवारिक एवं अन्य व्यवहार वाद,पारिवारिक विवाद,भूमि अधिग्रहण वाद, सर्विस मैटर से संबन्धित वेतन, भत्ता और सेवानिवृत्ति लाभ के मामले,राजस्व वाद जो जनपद न्यायालय में लम्बित हों तथा अन्य सिविल वाद आदि निस्तारित किये गये है।इस बार उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक वादों के निस्तारण के लक्ष्य को सर्वाेपरि रखते हुए तैयारी की गयी थी, जिसके फलस्वरूप सभी न्यायिक अधिकारियों के अथक प्रयास व प्रशासन के सहयोग व बैंक की सहभागिता से कुल 71501 वादों का सफलतापूर्वक निस्तारण कराया गया।यह राष्ट्रीय लोक अदालत के प्रति सभी का सामूहिक सहयोग व सराहनीय कार्य के फलस्वरूप ही सम्भव हुआ है।दीपक यादव,नोडल अधिकारी,राष्ट्रीय लोक अदालत/अपर जिला जज ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में पक्षकारों द्वारा अपने वादों का निस्तारण कराये से धन व समय की बचत होती है,आपसी प्रेम भाईचारे व बन्धुता की भावना समाज में पनपती है।पूर्व की राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित वादों से अधिक वादों केे निस्तारण का लक्ष्य रखते हुए इस राष्ट्रीय लोक अदालत में पहले से तैयारी की गयी थी जिसमें हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहें हैं और अपने इस प्रयास को उत्तरोत्तर जारी रखेंगे तथा राष्ट्रीय लोक अदालत के उद्देश्यों को सफल बनाने में अपना योगदान देते रहेंगे।बताया गया कि शनिवार को संपन्न हुई राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 71501 वादों को निस्तारित किया गया एवं कुल समझौता राशि मु. 180385956/ रूपए है। पीठासीन अधिकारी एम.ए.सी.टी रवि कांत-तृतीय द्वारा कुल 117 वाद निस्तारित किए गए तथा कुल 97616528/- रूपए की धनराशि क्षतिपूर्ति निर्धारित की गयी,प्रधान न्यायाधीश कुटुम्ब न्यायालय द्वारा 64 तथा पीठासीन अधिकारी कामर्शियल कोर्ट द्वारा 15 वाद निस्तारित किए गए।बैंक रिकवरी से संबंधित 1174 प्री-लिटिगेशन वाद निस्तारित किए गए तथा बैंक संबन्धित ऋण मु. 66103643 रुपए का सेटेलमेंट किया गया जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक है। यह एल.डी.एम. गणेश सिंह यादव द्वारा उठाया गया एक सराहनीय कदम हैं।राष्ट्रीय लोक अदालत में सत्र न्यायालय द्वारा 65 वाद तथा मजिस्ट्रेट न्यायालयों द्वारा 19732 मामले निस्तारित किए गए,जिसके एवज में कुल 12329204 रूपए अर्थदण्ड अध्यारोपित किया गया।इस प्रकार विभिन्न न्यायालयों द्वारा कुल 20044 मामले निस्तारित किए गए। राष्ट्रीय लोक अदालत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 4141 वाद,अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम द्वारा 2079 वाद तथा सिविल न्यायालय द्वारा कुल 312 मामलों का निस्तारण किया गया,जो विगत लोक अदालत की तुलना में अधिक है।यह सभी के द्वारा किये गये सामूहिक प्रयास का द्योतक है।इसके अलावा
राजस्व से संबन्धित 29283 मामले विभिन्न राजस्व न्यायालय द्वारा निस्तारित किए गए।राष्ट्रीय लोक अदालत में पीठासीन अधिकारी(वर्चुअल कोर्ट) प्रत्युश आनंद मिश्रा ने अथक प्रयास करते हुए 22008 वादों का निस्तारण किया।राष्ट्रीय लोक अदालत के सफल आयोजन में प्रत्युश आनंद मिश्रा द्वारा अत्यंत ही सराहनीय कार्य किया गया है।

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