दरअसल, बाल्टिक सागर के तल पर एक अजीब सी चीज मौजूद थे, जिसके बारे में पहले कहा जा रहा था कि वो यूएफओ है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसकी सच्चाई का पता लगा लिया है कि वो रहस्यमय चीज आखिर क्या है? बाल्टिक सागर में छिपी इस रहस्यमय चीज को गोताखोरों ने ढूंढा था, जो मूल रूप से जहाज के मलबे की खोज कर रहे थे
धरती से लेकर समंदर तक, तरह-तरह के रहस्यों से भरे पड़े हैं. ऐसा माना जाता है कि समंदर की अथाह गहराई में ऐसी कई चीजें छिपी हो सकती हैं, जिनके बारे में इंसानों ने अंदाजा भी नहीं लगाया होगा. बाल्टिक सागर में भी ऐसा ही एक रहस्य छिपा हुआ था, जिसे एक लाख 40 हजार साल पुराना बताया जाता है. दरअसल, बाल्टिक सागर के तल पर एक अजीब सी चीज मौजूद थे, जिसके बारे में पहले कहा जा रहा था कि वो यूएफओ है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने इसकी सच्चाई का पता लगा लिया है कि वो रहस्यमय चीज आखिर क्या है? बाल्टिक सागर में छिपी इस रहस्यमय चीज को गोताखोरों ने ढूंढा था, जो मूल रूप से जहाज के मलबे की खोज कर रहे थे. कुछ लोगों का मानना है कि उस चीज का निर्माण धातु के सीधे और कोणीय टुकड़ों से हुआ है. इसने सालों तक लोगों को हैरान किया, क्योंकि कोई भी निश्चित रूप से ये नहीं जानता था कि ये चीज क्या है या ये वहां कैसे पहुंची. मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, स्वीडिश खोजकर्ता पीटर लिंडबर्ग और डेनिस असबर्ग जून 2011 में ‘ओशन एक्स’ टीम के हिस्से के रूप में उत्तरी बाल्टिक सागर में खजाने की तलाश में थे जब उनके सोनार रडार ने पानी के नीचे पहाड़ की घाटी में 70 फीट लंबे मिलेनियम फाल्कन जैसे दिखने वाले टुकड़े का पता लगाया. एक बड़ी चट्टान की तरह दिखने वाली इस रहस्यमय संरचना को लेकर कई अटकलें लगाई गईं. कुछ लोगों ने अनुमान लगाया कि यह अटलांटा के खोए हुए शहर के अवशेष हो सकते हैं, तो कुछ ने कहा कि ये किसी दुर्घटनाग्रस्त यूएफओ के अवशेष होंगे. वहीं, कुछ वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह प्राकृतिक चीजों से नहीं बना है बल्कि यह धातु से बना है. ओशन एक्स के गोताखोर स्टीफन होगरबॉर्न ने बताया कि ‘जब हम उस वस्तु के ऊपर थे तो वहां मौजूद किसी भी बिजली की चीज और सैटेलाइट फोन ने भी काम करना बंद कर दिया. फिर जब हम लगभग 200 मीटर दूर चले गए, तो यह फिर से चालू हो गया’.स्टॉकहोम में मैरिटाइम म्यूजियम के मरीन आर्कियोलॉजिस्ट गोरान एकबर्ग ने कहा, ‘इसके प्राकृतिक, भूवैज्ञानिक संरचना से इंकार नहीं किया जा सकता है. मैं मानता हूं कि यह खोज अजीब लगती है, क्योंकि यह पूरी तरह से गोलाकार है, लेकिन प्रकृति ने इससे भी अजीब चीजें पैदा की हैं’. उनका मानना है कि बाल्टिक सागर में मौजूद ये रहस्यमय चीज हिम युग के दौरान समुद्र के उस क्षेत्र में हुई हिमनद गतिविधियों की प्रक्रिया के अवशेष हैं.
