नहीं रहेगी अब प्रधानाचार्य के पद पर तदर्थ (एडाक) प्रोन्नति की व्यवस्था
लखनऊ/फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। उ0प्र0शिक्षा सेवा चयन आयोग विधेयक के विधानसभा में पारित होने से अब सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद पर तदर्थ पदोन्नति की व्यवस्था नहीं रहेगी। यानि भविष्य में नियमिति प्रधानाचार्य के सेवानिवृत्त होने के पश्चात विद्यालय के वरिष्ठतम शिक्षक कार्यवाहक प्रधानाचार्य तो बनाया जायेगा, परन्तु उन्हें अब प्रधानाचार्य पद का वेतन नहीं दिया जायेगा। नये आयोग के विधेयक में चयन बोर्ड की धारा-18 को भी हटा दिया गया है, जिसके अन्तर्गत प्रधानाचार्य के पद पर विद्यालय के वरिष्ठतम शिक्षक की तदर्थ पदोन्नति की व्यवस्था थी। विदित है कि विधेयक पारित होने से पूर्व प्रधानाचार्य पद पर कार्य करने वाले वरिष्ठतम शिक्षक को 60 दिन की सेवा के बाद तदर्थ पदोन्नति दिये जाने की व्यवस्था थी और प्रधानाचार्य के वेतन मान में वृद्धि की जाती है, वर्तमान में विधेयक पारित हो जाने से प्रधानाचार्यों को लाभ मिलने वाली यह व्यवस्था समाप्त हो गई है।
63 हजार शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा पर भी मंडराया खतरा, निलम्बन पर चयन बोर्ड के पूर्वानुमोदन की व्यवस्था समाप्त
फर्रुखाबाद। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के लगभग 63 हजार शिक्षक-शिक्षिकाओं की सेवा-सुरक्षा भी विधेयक पारित होने से खतरे में पड़ जायेगी। शिक्षकों का चयन उ0प्र0 माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होता है, लेकिन नियोक्ता प्रबंधक होते है। चयन बोर्ड अधिनियम 1982 की धारा 21 में यह प्रावधान है कि प्रधानाचार्य या शिक्षक पर कोई कार्यवाही करने या दंड देने से पहले प्रबंधक चयन बोर्ड से अनुमोदन लेते है। नये विधेयक की धारा 16 के अनुसार अब एडेड कालेजों के शिक्षकों की सेवा शर्ते और सुरक्षा इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम-1921 के विनियमों के अध्याय-3 के अनुसार संचालित होगी। जिसके तहत आशंका है कि अब प्रबधंकों के हाथों शिक्षकों का उत्पीडऩ और भी बढ़ जायेगा।
