नियत तिथि पर आख्या तामील न कराने पर कानपुर नगर पुलिस आयुक्त सहित संबंधित पुलिस के अधिकारियों पर होगा मामला दर्ज
फर्रुखाबाद, समृद्धि न्यूज। 25 मार्च 2008 को अभियुक्तगण अशोक कुमार, महाराज सिंह, बृजेंद्र सिंह, छविराम सिंह, राजवीर सिंह, नीरज कुमार, घनश्याम, विनोद कुमार को धारा 382 के अंतर्गत विचरण हेतु तलब किया गया। इसके पश्चात अभियुक्तगण के विरुद्ध विभिन्न तिथियों पर लगातार गैर जमानती अधिपत्र एवं धारा 82 की कार्रवाई निर्गत की गई। संबंधित पुलिस अधीक्षक को अभियुक्तगण के उपरोक्त के संबंध सुनिश्चित कर जाने हेतु आदेशित एवं पत्र प्रेषित किए गए, किंतु अभियुक्त विनोद के अतिरिक्त अन्य कोई अभियुक्त न्यायालय में उपस्थित नहीं हुआ और ना किसी अभियुक्त को गिरफ्तार का न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। अभियुक्तगण की वर्तमान तैनाती स्थल पर आदेशिकाओं की तामीला के संदर्भ में पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक को कई बार पत्र प्रेषित किये। पुलिस महानिदेशक को भी पत्र भेजा गया। अभियुक्तगण पुलिस विभाग में कार्यरत हैं। जिनके ऊपर न्यायालय में प्रत्येक आदेश का अनुपालन की जिम्मेदारी है। वर्तमान तैनाती स्थल कां0 राजवीर जिला हापुड़, एसआई महाराज सिंह झांसी, छविराम सिंह जिला कन्नौज, कां0 नीरज कुमार जिला कानपुर नगर के पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक को पत्र प्रेषित किये गये। जिनके द्वारा कोई सम्यक प्रयास अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए नहीं किया गया। परिवादी द्वारा मुकदमा पंजीकृत कराये जाने की याचना की गई। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र कुमार ने जारी किये आदेश में कहा कि न्यायालय न्यायहित में यह आवश्यक समझता है कि अभियुक्तगण के विरुद्ध धारा १४७ए के तहत मुकदमा पंजीकृत कराये जाने से पूर्व अभियुक्तगणों के विरुद्ध धारा ८२ के आदेशिकाओं की तामीला के संबंध में पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक से आख्या आहूत किया जाना आवश्यक है। ऐसी स्थिति में पुलिस अधीक्षक हापुड़, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कन्नौज, पुलिस आयुक्त कानपुर नगर को निर्देशित किया जाता है कि अभियुक्तगण के विरुद्ध निर्गत गैर जमानतीय अधिपत्र/धारा ८२ प्रक्रिया की आदेशिकाओं की तामीला आख्या अग्रिम तिथि से पूर्व न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना सुनिश्चित करें। न्यायालय ने आदेशित किया है कि इसमें किसी प्रकार की त्रुटि ना की जाए, यदि नियत तिथि पर संबंधित पुलिस आयुक्त/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक द्वारा न्यायालय के समक्ष आख्या प्रस्तुत नहीं की जाती है तो उनके विरुद्ध धारा 349 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत नियम अनुसार प्रकीर्ण वाद दर्ज किया जाएगा और अग्रिम कार्रवाई करते हुए न्यायालय के समक्ष उनकी व्यक्तिगत स्थिति स्पष्टीकरण आहूत की जाएगी। जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी उनकी स्वयं की होगी। न्यायालय ने अगली तिथि 5 दिसंबर 2023 के लिए नियति की है। ——————–
