गाजा में शांति पहल के लिए भारत को न्योता

समृद्धि न्यूज। डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा के पुनर्निर्माण और शासन व्यवस्था के लिए बोर्ड ऑफ पीस का गठन किया है। इजराइल-हमास युद्ध के बाद गाजा की स्थिति सुधारने के लिए यह अंतरराष्ट्रीय संगठन बनाया गया है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को गाजा में शांति बहाली के लिए बनाए जा रहे बोर्ड ऑफ पीस का हिस्सा बनने का निमंत्रण दिया है। यह बोर्ड गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने और शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बनाया जा रहा है। साथ ही यह पहल गाजा में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए ट्रंप की 20 सूत्रीय शांति योजना से जुड़ी है। अमेरिका इस योजना के दूसरे चरण को लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हमास और इजराइल के बीच युद्ध साल 2023 में शुरू हुआ था। इस लंबे समय में कई अटैक हुए, मिसाइल बरसाईं गईं, बमबारी हुई। जिसने गाजा में तबाही मचाई। बड़ी तादाद में लोगों की मौत हुई, ऐसी भी तस्वीरें सामने आई जहां दिखाई दिया कि गाजा में इतने बुरे हालात हो गए हैं कि लोग भुखमरी का सामना कर रहे हैं। बच्चे कुपोषण का सामना कर रहे हैं। इसी के बाद ट्रंप ने 20 प्वाइंट पीस डील पेश की। जिसके तहत युद्धविराम हुआ, अब जहां इस डील के चलते युद्धविराम हुआ हैं, वहीं, अब गाजा को एक बार फिर विकसित करने का काम किया जा रहा है। गाजा को फिर से विकसित करने में, खंडहर हो चुके गाजा को फिर से लोगों के लिए बेहतर बनाने में यह शांति बोर्ड अहम रोल निभाएगा। ट्रंप ने इस शांति बोर्ड को लेकर कहा, अब सपनों को हकीकत में बदलने का समय आ गया है, इस पहल का सबसे अहम हिस्सा एक अंतरराष्ट्रीय बोर्ड ऑफ पीस बनाना है, ट्रंप के मुताबिकए यह बोर्ड एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन और अस्थायी सरकार के तौर पर बनाया जाएगा। इसका मुख्य काम शासन को बेहतर बनाना, गाजा का पुनर्निर्माण करना और आर्थिक निवेश के जरिए वहां शांति लाना होगा। बता दें कि भारत को यह न्योता उसकी वैश्विक साख, संतुलित विदेश नीति और शांति प्रयासों में भूमिका को देखते हुए दिया गया है। माना जा रहा है कि इस बोर्ड में शामिल देश गाजा की स्थिति पर नजर रखेंगे, मानवीय सहायता, पुनर्निर्माण और संघर्ष रोकने से जुड़े कदमों पर विचार करेंगे। हालांकि, इस प्रस्ताव पर भारत की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ऐसे में यदि भारत इस पहल में शामिल होता है, तो यह पश्चिम एशिया में शांति प्रक्रिया में उसकी भूमिका को और मजबूत कर सकता है।

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