प्रयागराज: प्रयागराज माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी है, मौनी अमावस्या विवाद के बाद से वे शिविर के बाहर बैठे हैंए स्वास्थ्य बिगड़ गया है। बुखार के बावजूद चिकित्सा नहीं ले रहे, प्रशासन से माफी और ससम्मान स्नान की मांग पर अड़े हैं, जिससे 1.25 लाख शिवलिंगों की स्थापना प्रभावित हुई है। माघ मेला 2026 में आज वसंत पंचमी का स्नान पर्व है, ढाई से तीन करोड़ श्रद्धालुओं के संगम स्थान का अनुमान है इस बीच ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मौनी अमावस्या के दिन से ही प्रशासन द्वारा पालकी से स्नान करने जाने पर रोग लगाए जाने के बाद से अपने ही शिविर के बाहर पालकी पर धरने पर बैठे हुए थे। पिछले 5 दिनों से धरना दे रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत शुक्रवार को अचानक बिगड़ गई। तेज बुखार और बदन दर्द के कारण वह सुबह पालकी से उतरे और अपनी वैनिटी वैन में चले गए, शिष्यों ने बताया कि सुबह से वह वैन से बाहर नहीं आए हैं, उन्हें तेज बुखार है। मौनी अमावस्या पर मेला प्रशासन ने स्नान करने के लिए जाने के दौरान उनकी पालकी रोक दी थी, इसके बाद उनके शिष्यों और अधिकारियों के बीच तीखी नोंक झोक हुए थी। इसके बाद प्रशासन ने उन्हें स्नान करने से पहले ही वापस लौटा दिया था। शंकराचार्य के शिष्यों का आरोप है कि चोटी और शिखा पकडक़र उनको पटक कर मारा गया, इतना ही नहीं, दंड छीनकर फेंक दिए गए, पिटाई के बाद कई साधु-संन्यासियों की हालत खराब हो गई। संगम तट पर आयोजित माघ मेले मौनी अमावस्या पर संगम में स्नान से रोके जाने के बाद से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद धरने पर बैठे हैं। शिविर के बाहर बैठे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की तबीयत बिगड़ गई है। 18 जनवरी से ही शाम पांच बजे से स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठे हैं, उन्होंने स्नान के लिए जाते समय प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जाहिर की थी। इस दौरान उनके शिष्यों के साथ भी धक्का मुक्की की गई थी। वहीं आज सुबह उनकी तबीयत खराब हो गई, बुखार आने के बाद वो वैनिटी वैन में सुबह 10 बजे चले गए थे, दोपहर 2 बजे वैनिटी वैन से उतर कर फिर शिविर के सामने पालकी पर बैठ गए हैं।
